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चंडीगढ़ में स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा बढ़ाई गई

चंडीगढ़ (Chandigarh) में स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने का मामला लगातार चर्चा में है। पहले सेक्टर-56, सेक्टर-33डी, सेक्टर-19सी और सेक्टर-23 के सरकारी स्कूलों को धमकी भरे ईमेल मिलने की जानकारी सामने आई थी। अब आठ…

VishwajagranVishwajagran
October 15, 2026
2 min read
चंडीगढ़ में स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा बढ़ाई गई

चंडीगढ़ (Chandigarh) में स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने का मामला लगातार चर्चा में है। पहले सेक्टर-56, सेक्टर-33डी, सेक्टर-19सी और सेक्टर-23 के सरकारी स्कूलों को धमकी भरे ईमेल मिलने की जानकारी सामने आई थी। अब आठ अन्य स्कूलों को भी ईमेल के जरिए निशाना बनाने की धमकी मिलने की सूचना है। इनमें सरकारी और निजी, दोनों प्रकार के शिक्षण संस्थान शामिल हैं।

लगातार कई स्कूलों के नाम सामने आने के बाद विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

इन आठ स्कूलों को मिली धमकी

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जिन स्कूलों को धमकी भरे ईमेल मिलने की बात कही जा रही है, उनमें ये संस्थान शामिल हैं:

  • सेक्टर-46ए का आशियाना स्कूल

  • मनीमाजरा का रिमिट स्कूल

  • सेक्टर-20डी का सरकारी स्कूल

  • सेक्टर-28 का सेंट सोल्जर्स स्कूल

  • सेक्टर-41सी का शिवालिक पब्लिक स्कूल

  • सेक्टर-26 का सेंट जॉन स्कूल

  • सेक्टर-37 का सेंट पीटरसन स्कूल

  • सेक्टर-37 का प्ले वे स्मार्ट स्कूल

इन संस्थानों को लेकर सामने आई जानकारी के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सभी स्कूलों को धमकी देने के लिए एक ही व्यक्ति या समूह ने ईमेल भेजे हैं या इसके पीछे अलग-अलग स्रोत हैं।

ईमेल की जांच और सुरक्षा व्यवस्था अहम

ऐसे मामलों में धमकी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। ईमेल भेजने वाले की पहचान करना, संदेश की विश्वसनीयता जांचना और स्कूल परिसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। फिलहाल उपलब्ध विवरण में ईमेल भेजने वाले की पहचान, किसी संदिग्ध वस्तु की बरामदगी या सभी स्कूलों की जांच के नतीजों की आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

इसलिए मामले से जुड़े निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की जांच से ही पता चल सकेगा कि धमकियां कितनी गंभीर थीं और इनके पीछे कौन जिम्मेदार है। अभिभावकों और विद्यार्थियों को सलाह है कि वे अपुष्ट संदेशों पर भरोसा करने के बजाय स्कूल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान दें।

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