रेपो रेट में नहीं हुआ बदलाव, नहीं बढ़ेगी ईएमआई

रेपो रेट में नहीं हुआ बदलाव, नहीं बढ़ेगी ईएमआई

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रेपो रेट (Repo Rate) में बदलाव नहीं किया है। आरबीआई ने इसे 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा है। इससे होम और कार लोन महंगे नहीं होंगे तथा ईएमआई नहीं बढ़ेगी।
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की 3 दिवसीय द्विमासिक समीक्षा बैठक के बाद इस फैसले की घोषणा की। मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति ने तटस्थ रुख को बरकरार रखते हुए चालू वित्त वर्ष की दूसरी मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दर रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर यथावत रखा। साथ ही चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।
मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच हमें भरोसा है कि हम चुनौतियों से पार पाते हुए और मजबूती से उभर कर निकलेंगे। उन्होंने कहा, “इस साल के लिए रियल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) ग्रोथ का अनुमान अब 6.6 फीसदी है। पहले हमने 6.9 फीसदी का अनुमान लगाया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए 6.6 फीसदी, दूसरे के लिए 6.3 फीसदी, तीसरी के लिए 6.5 फीसदी और चौथी के लिए 6.8 फीसदी का अनुमान है।”
हर दो महीने में एमपीसी की बैठक
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) में छह सदस्य होते हैं। इनमें से तीन रिजर्व बैंक के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। रिजर्व बैंक की हर दो महीने में मौद्रिक समीक्षा की बेठक होती है। वित्त वर्ष 2026-27 में मौद्रिक समीक्षा समिति की कुल 6 बैठकें होंगी, पहली बैठक 6-8 अप्रैल, 2026 को हुई थी।
क्या होता है रेपो रेट (Repo Rate) 
आरबीआई जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है, उसे रेपो रेट (Repo Rate) कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अक्सर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं यानी बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं।
उल्लेखनीय है कि आरबीआई ने अप्रैल महीने में एमपीसी की समीक्षा बैठक में सर्वसम्मति से तटस्थ रुख अपनाते हुए रेपो रेट (Repo Rate) को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा था। रिजर्व बैंक ने आखिरी बार दिसंबर 2025 में नीतिगत ब्याज दर रेपो रेट को 0.25 फीसदी घटाकर 5.25 फीसदी की थी।