नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने जा रहे हैं? जान लें सही दिशा और जरूरी सावधानियां
शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले हैं। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाएगी। नवरात्रि की तैयारियों में अखंड ज्योति का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि नौ दिनों तक लगातार…

शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले हैं। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाएगी। नवरात्रि की तैयारियों में अखंड ज्योति का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि नौ दिनों तक लगातार दीपक जलाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।
इस मुहूर्त में जलाएं अखंड ज्योति
रविवार, 11 अक्टूबर को सुबह 6:19 से सुबह 10:12 के बीच घटस्थापना के मुहूर्त में अखंड ज्योति प्रज्वलित करना शुभ माना गया है। अधिकांश परिवार कलश स्थापना के बाद दीपक जलाते हैं और मां दुर्गा से दीपक स्वीकार करने तथा नौ दिनों तक घर में विराजमान रहने की प्रार्थना करते हैं।
घी या तेल, क्या है बेहतर?
अखंड दीपक के लिए शुद्ध गाय का घी सबसे अच्छा माना जाता है। मान्यता के अनुसार घी का दीपक घर में शांति और समृद्धि का वातावरण बनाता है। हालांकि, कुछ परिवार अपनी परंपरा के अनुसार तिल या सरसों के तेल का दीपक भी जलाते हैं। दोनों ही विकल्प स्वीकार्य माने जाते हैं, लेकिन एक ही दीपक में घी और तेल को मिलाकर नहीं जलाना चाहिए।
माता के किस ओर रखें दीपक?
कई पंडितों के अनुसार घी का दीपक देवी के दाहिनी ओर और तेल का दीपक देवी के बाईं ओर रखा जा सकता है। अखंड ज्योति नौ दिनों तक लगातार जलती है, इसलिए इसके लिए एक किलो से अधिक घी की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में अतिरिक्त घी पहले से माता की चौकी के पास रखना उपयोगी रहेगा।
किस दिशा में होनी चाहिए ज्योति?
वास्तु के अनुसार घर या पूजा स्थल का दक्षिण-पूर्व कोना अग्नि तत्व से जुड़ा माना जाता है और अखंड ज्योति के लिए इसे उपयुक्त माना जाता है। दीपक की लौ पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। वहीं, अखंड दीपक को दक्षिण दिशा में रखने से बचने की सलाह दी जाती है।
दीपक को जमीन पर न रखें
अखंड ज्योति के लिए पीतल का दीपक, खासकर कांच के कवर वाला दीपक, इस्तेमाल किया जा सकता है। मिट्टी का दीपक भी विकल्प है। इसे सीधे जमीन पर रखने के बजाय लकड़ी की चौकी, तांबे या पीतल की थाली अथवा अक्षत और अष्टदल कमल के ऊपर स्थापित करें। सवा हाथ लंबी सूती बत्ती को अखंड ज्योति के लिए उपयुक्त माना जाता है। कुछ परिवार बत्ती में कलावा भी लपेटते हैं।
अगर अखंड ज्योति बुझ जाए तो घबराएं नहीं
अगर नौ दिनों के दौरान अखंड ज्योति बुझ जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। हवा का झोंका, बत्ती का बहुत नीचे जलना या घी खत्म हो जाना इसके सामान्य कारण हो सकते हैं। दीपक बुझने को किसी अनहोनी का संकेत मानना जरूरी नहीं है। नवरात्रि में मां दुर्गा की भक्ति और श्रद्धा को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।
‘साक्षी दीपक’ रखें साथ
अखंड ज्योति जलाने के बाद रात में एक छोटा बैकअप दीया यानी ‘साक्षी दीपक’ जलाकर रखना उपयोगी माना जाता है। मुख्य दीपक बुझने पर उससे दोबारा ज्योति जलाई जा सकती है। इसके बाद मां दुर्गा से क्षमा प्रार्थना कर पूजा जारी रखें।
सुरक्षा का भी रखें ध्यान
नौ दिनों तक जलने वाली खुली लौ को पर्दों, पंखों और एसी की हवा से दूर रखें। बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से भी दीपक को दूर रखना जरूरी है। दीपक जलता हो तो घर को पूरी तरह खाली न छोड़ें। अगर परिवार को बाहर जाना जरूरी हो तो किसी पड़ोसी या रिश्तेदार से इसकी निगरानी कराने की व्यवस्था करें।
नवरात्रि खत्म होने पर क्या करें?
नवरात्रि की अंतिम पूजा के बाद अखंड ज्योति को खुद बुझने देना चाहिए। इसे जानबूझकर बुझाने से बचने की सलाह दी जाती है। दीपक ठंडा होने के बाद बची हुई बत्ती और घी को किसी पौधे की मिट्टी में डाल सकते हैं या बहती नदी में प्रवाहित कर सकते हैं।
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