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नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा

मेरठ: सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाया है। करीब 19 महीने 11 दिन बाद आए इस फैसले में जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने दोनों को सौरभ की हत्या के मामले में…

VishwajagranVishwajagran
October 14, 2026
2 min read
नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा

मेरठ: सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाया है। करीब 19 महीने 11 दिन बाद आए इस फैसले में जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने दोनों को सौरभ की हत्या के मामले में फांसी की सजा दी। सजा पर सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। वहीं, बचाव पक्ष ने मुस्कान और साहिल की दो बेटियों का हवाला देकर अदालत से मौत की सजा न देने की अपील की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुना दिया।

साहिल ने पुराने अपराध से किया इनकार

सजा सुनाने से पहले अदालत ने साहिल शुक्ला से उसके आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में सवाल किया। साहिल ने कहा कि वह इससे पहले किसी अपराध में शामिल नहीं रहा है। जब न्यायाधीश ने उसे सजा के संबंध में अपनी बात रखने का मौका दिया, तो उसने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

परिवार ने कहा- दोषियों को मिले कड़ी सजा

सौरभ राजपूत के परिजनों ने फैसले से पहले दोनों आरोपियों को फांसी देने की मांग की थी। परिवार का कहना था कि इस तरह के अपराधों में सख्त सजा मिलने से समाज में स्पष्ट संदेश जाएगा। परिजनों ने यह भी कहा कि सौरभ की मौत से परिवार को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई संभव नहीं है। उनके मुताबिक, दोषियों को कड़ी सजा मिलने से ही उन्हें न्याय का एहसास होगा।

पुलिस ने दाखिल की थी चार्जशीट

नीला ड्रम हत्याकांड सामने आने के बाद मामला काफी चर्चा में रहा था। पुलिस ने जांच पूरी कर मुस्कान और साहिल के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। अदालत ने दोनों को सौरभ की हत्या और साक्ष्य छिपाने से जुड़े आरोपों में दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा तय करने के लिए अलग से सुनवाई हुई, जिसमें अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता पर जोर दिया, जबकि बचाव पक्ष ने दोनों की पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला दिया।

अदालत के फैसले के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। मृत्युदंड के मामलों में फैसले के बाद भी निर्धारित न्यायिक प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होती हैं।

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