नोएडा, 2 जुलाई। उत्तर प्रदेश के नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) के सेक्टर-30 में स्थित सुपर स्पेशियलिटी बाल चिकित्सालय एवं स्नातकोत्तर शिक्षण संस्थान (चाइल्ड पीजीआई) में एक बड़ा हादसा होने से बाल-बाल टल गया। अस्पताल के एक वार्ड में भर्ती मासूम मरीज के बेड के ऊपर अचानक फॉल सीलिंग का एक बड़ा हिस्सा टूटकर गिर गया। गनीमत यह रही कि हादसे के वक्त बेड पर मौजूद बच्चा और उसके पास खड़े तीमारदार इसकी सीधी चपेट में आने से बच गए। इस अचानक हुई घटना से पूरे वार्ड में अफरा-तफरी और हड़कंप मच गया, जिसके बाद अस्पताल की सरकारी बिल्डिंग के निर्माण की गुणवत्ता तथा वहां इलाज करा रहे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
वार्ड में भर्ती बच्चों के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के रख-रखाव पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि इलाज कराने आए मासूम मरीजों के ठीक ऊपर छत का हिस्सा गिरना बेहद खतरनाक है और यदि समय रहते अस्पताल प्रबंधन ने सुरक्षा मानकों और मरम्मत कार्यों पर ध्यान नहीं दिया, तो भविष्य में कोई बड़ा और जानलेवा हादसा हो सकता है।
इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए चाइल्ड पीजीआई के निदेशक डॉ. अरुण कुमार सिंह ने बताया कि यह घटना लगभग एक सप्ताह पुरानी है। उन्होंने साफ किया कि मुख्य कंक्रीट की छत गिरने की कोई घटना नहीं हुई है, बल्कि छत के नीचे लगी फॉल सीलिंग का एक टुकड़ा अचानक टूटकर नीचे गिरा था। निदेशक ने राहत की बात बताते हुए पुष्टि की कि इस हादसे में किसी भी बच्चे या मरीज को कोई चोट नहीं आई है और सभी पूरी तरह सुरक्षित हैं।
अस्पताल प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए आंतरिक जांच के सख्त आदेश जारी कर दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस निर्माण और रख-रखाव में लापरवाही किस स्तर पर हुई है। अधिकारियों को अस्पताल भवन की सभी खामियों को तत्काल प्रभाव से दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रबंधन का कहना है कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यदि किसी भी अधिकारी, निर्माण एजेंसी या ठेकेदार की ढिलाई उजागर होती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, एहतियातन अस्पताल के अन्य सभी वार्डों की फॉल सीलिंग और पूरे भवन की सुरक्षा स्थिति का गहन निरीक्षण कराया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी किसी घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।
