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गुणवत्ता और शुद्धता से कोई समझौता नहीं, दुनिया उत्तर प्रदेश के व्यंजनों के पीछे आएगी: CM Yogi

Bindu Mishra
November 5, 2026
9 min read
 गुणवत्ता और शुद्धता से कोई समझौता नहीं, दुनिया उत्तर प्रदेश के व्यंजनों के पीछे आएगी: CM Yogi

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों और खानपान की विविधता को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुजीन' (ओडीओसी) अभियान को अब तहसील, ब्लॉक और गांव स्तर तक ले जाया जाएगा। अभी तक जिला स्तर पर चिह्नित व्यंजनों के अलावा भी प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे पारंपरिक पकवान हैं, जिन्हें पहचान और बाजार उपलब्ध कराने की जरूरत है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक क्षेत्र के खास व्यंजनों को मंच मिले, उन्हें तकनीक और बेहतर पैकेजिंग से जोड़ा जाए तथा वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जाए। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में दैनिक जागरण की ओर से आयोजित 'एक जनपद-एक व्यंजन' कार्यक्रम में कहीं।

जिलों के पारंपरिक पकवानों में वैश्विक बाजार में जगह बनाने की अपार संभावनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के हर जिले की अपनी अलग खानपान की परंपरा और विशेष स्वाद है। इसे पहचानने और आगे बढ़ाने की जरूरत है। बलिया का बाटी-चोखा, जौनपुर की इमरती और अलग-अलग जिलों के पारंपरिक पकवानों में वैश्विक बाजार में जगह बनाने की अपार संभावनाएं हैं। यदि इन व्यंजनों की गुणवत्ता, शुद्धता और पैकेजिंग पर ध्यान दिया जाए तो ये बड़े ब्रांड बन सकते हैं। मुख्यमंत्री ने दैनिक जागरण परिवार को इस आयोजन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि उसने प्रदेश के हलवाइयों, कारीगरों और परिवारों को अपनी पाक कला प्रदर्शित करने के लिए एक बड़ा मंच दिया है।

आगे वही संस्थान और व्यवस्था बढ़ती है, जो जनता की नब्ज पहचान कर उसकी भावनाओं का सम्मान करती है

सीएम योगी ने कहा कि दैनिक जागरण की स्थापना वर्ष 1942 में झांसी में हुई थी। उस समय देश भारत छोड़ो आंदोलन के जरिए ब्रिटिश हुकूमत से मुक्ति के लिए संघर्ष कर रहा था। झांसी से शुरू हुई दैनिक जागरण की यात्रा आज उत्तर भारत के प्रमुख हिंदी दैनिक के रूप में स्थापित हुई है। आगे वही संस्थान और व्यवस्था बढ़ती है, जो जनता की नब्ज पहचान कर उसकी भावनाओं का सम्मान करती है। ओडीओसी भी इसी सोच का हिस्सा है। इसका उद्देश्य कारीगरों, हलवाइयों और घरों में व्यंजन बनाने वाली माताओं-बहनों के श्रम और हुनर को सम्मान देना है। यह स्वदेशी मॉडल और लोकल टू ग्लोबल की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। हमें अपने स्थानीय उत्पादों के लिए वोकल होना होगा। भारतीय परंपरा में अन्न को हमेशा सम्मान दिया गया है। हमारे शास्त्रों में अन्न को ब्रह्म का स्वरूप मानते हुए 'अन्नम ब्रह्म' कहा गया है। जैसा अन्न हम खाते हैं, वैसा ही हमारा मन और स्वास्थ्य बनता है। अन्न को अलग-अलग रूपों में तैयार करना और उसमें मूल्य संवर्धन करना हमारी प्राचीन परंपरा का हिस्सा है। मथुरा-वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग अर्पित किए जाते हैं। यह हमारी समृद्ध पाक कला का उदाहरण है। अच्छा और स्वादिष्ट भोजन बनाने के लिए मन और अंतःकरण का शुद्ध होना भी जरूरी है।

वर्ष 2018 में शुरू की 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट' योजना

सीएम योगी ने 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) योजना की शुरुआत की सोच भी साझा की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का लोक कल्याण संकल्प पत्र तैयार किया जा रहा था। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने उत्तर प्रदेश की ताकत के रूप में यहां की पारंपरिक खेती और परंपरागत उद्यमों को एक साथ आगे बढ़ाने की बात कही थी। उस समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अमित शाह ने उन्हें मुरादाबाद के पीतल उद्योग, अलीगढ़ के ताला उद्योग और वाराणसी की साड़ी जैसे पारंपरिक उत्पादों का उदाहरण देकर परंपरागत उद्यमों की ताकत समझाई थी। वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद उन्हें म्यांमार की यात्रा के दौरान थाईलैंड में रुकने का अवसर मिला। वहां के अधिकारियों से अर्थव्यवस्था की मजबूती के बारे में बातचीत हुई तो उन्होंने भी पारंपरिक खेती के साथ मैन्युफैक्चरिंग को जोड़ने को आर्थिक विकास का आधार बताया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की एक समिति गठित कर प्रदेश के 75 जिलों के पारंपरिक उत्पादों की पहचान करने को कहा। सर्वे में 58 जिलों में विशिष्ट उत्पादों की जानकारी मिली, तब बाकी जिलों के लिए भी उत्पाद चिह्नित करने की तैयारी की गई। इसके बाद सभी 75 जिलों के लिए एक-एक विशिष्ट उत्पाद तय किया गया। वर्ष 2018 में ओडीओपी योजना शुरू की गई। इसके तहत उत्पादों को तकनीक, बाजार और ब्रांडिंग से जोड़ा गया।

प्रदेश में लगभग 80 उत्पादों को जीआई टैग

सीएम योगी ने कहा कि आज ओडीओपी के माध्यम से उत्तर प्रदेश करीब दो लाख करोड़ रुपये के उत्पादों का निर्यात कर रहा है। प्रदेश में लगभग 80 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। जीआई टैग से उत्पादों की विशिष्ट पहचान और वैश्विक बाजार में उनकी विश्वसनीयता बढ़ती है। इसी सफलता से प्रेरित होकर पिछले तीन-चार वर्षों से ओडीओसी की संभावनाओं पर काम किया जा रहा था। वह जब भी किसी जिले में जाते थे तो वहां के खानपान की अलग विशेषता देखने को मिलती थी। इसके बाद एक टीम को बिना किसी प्रचार के अलग-अलग जिलों के पारंपरिक व्यंजनों की पहचान करने की जिम्मेदारी दी गई। इस सर्वे में कई ऐसे व्यंजन सामने आए, जिनकी पहचान अभी व्यापक स्तर पर नहीं हो पाई है। पिछले वर्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों ओडीओसी की शुरुआत की गई थी। अब इसे और व्यापक बनाने की जरूरत है। सीएम ने खाद्य उत्पादों की बाजार क्षमता का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया की बड़ी खाद्य कंपनियों में शामिल नेस्ले का कारोबार करीब नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जो उत्तर प्रदेश सरकार के वार्षिक बजट के बराबर है। जब एक कंपनी खाद्य उत्पादों के जरिए इतना बड़ा कारोबार कर सकती है तो बलिया का बाटी-चोखा और जौनपुर की इमरती भी बड़े ब्रांड क्यों नहीं बन सकते? मुख्यमंत्री ने समारोह में एक छोटी बच्ची का उदाहरण भी दिया, जिसने अपनी मां के हाथों से बनी मूंग दाल की नमकीन का पैकेट उन्हें भेंट किया। बच्ची ने बताया कि उसकी मां घर पर नमकीन बनाती हैं और उसे बेचती भी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि ऐसे घरेलू उत्पादों को अच्छी पैकेजिंग और ब्रांडिंग से जोड़ दिया जाए तो वे बड़े व्यवसाय का रूप ले सकते हैं। उन्होंने विभाग और दैनिक जागरण परिवार से इस दिशा में सहयोग करने की अपील की।

मां, दादी, नानी और मौसी से महिलाएं व्यंजन बनाना सीखती हैं और बढ़ती है परंपरा

सीएम योगी ने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 1980 में वहां एक गवर्नर ने 'वन विलेज वन प्रोडक्ट' की अवधारणा शुरू की थी। इसके तहत 300 गांवों को उनके विशिष्ट उत्पाद तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया और इन उत्पादों को जीआई टैग भी दिलाया गया। इससे गांवों के कारीगरों और उत्पादकों को दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का लाभ हुआ। उत्तर प्रदेश की आबादी और यहां के खानपान की विविधता को देखते हुए इस क्षेत्र में इससे भी बड़ी संभावनाएं हैं। प्रदेश के हर परिवार में अलग-अलग समय और अवसरों के अनुसार तरह-तरह के व्यंजन तैयार किए जाते हैं। सुबह के नाश्ते से लेकर दोपहर और रात के भोजन तक खानपान की विविधता देखने को मिलती है। समोसा, जलेबी और रबड़ी जैसे व्यंजनों को भी अलग-अलग समय पर खाने की परंपरा है। पर्व और त्योहारों पर तो हर घर में अनेक प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। दीपावली से ठीक पहले आयोजित यह समारोह इसी पारंपरिक पाक कला को सामने लाने और उसे बाजार से जोड़ने का अच्छा अवसर है। यह हुनर परिवारों में पीढ़ियों से चला आ रहा है। मां, दादी, नानी और मौसी से महिलाएं व्यंजन बनाना सीखती हैं और फिर यह परंपरा आगे बढ़ती है। घरों में बनने वाले व्यंजनों की गुणवत्ता का ध्यान रखा जाता है। इसी शुद्धता को व्यावसायिक स्तर पर भी बनाए रखना होगा। भोजन हर व्यक्ति की जरूरत है। कोई व्यक्ति भोजन के बिना नहीं रह सकता। इसलिए खाद्य पदार्थों के व्यवसाय में गुणवत्ता और शुद्धता सबसे महत्वपूर्ण हैं। किसी भी तरह की मिलावट या ऐसा काम नहीं होना चाहिए, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़े। अधिक मुनाफा कमाने के लिए शॉर्टकट अपनाने वालों को इससे बचना होगा।जब उत्पादों की गुणवत्ता अच्छी होगी तो दुनिया खुद उनके पीछे आएगी। काशी में ऐसे कई पारंपरिक हलवाई और दुकानें हैं, जो दिन में केवल एक-दो घंटे खुलती हैं और इसी दौरान उनकी इतनी बिक्री हो जाती है कि उन्हें पूरे दिन दुकान चलाने की जरूरत नहीं पड़ती। यह पारंपरिक व्यंजनों की लोकप्रियता और बाजार की क्षमता को दर्शाता है।

महिला समूह बनाकर भी परिवार अतिरिक्त आमदनी कर सकते हैं

मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडीओसी अभियान को गांव स्तर तक पहुंचाया जाएगा। इससे छूटे हुए व्यंजनों और स्थानीय उत्पादों की पहचान हो सकेगी। प्रयास होगा कि पात्र उत्पादों को जीआई टैग मिले और उन्हें बाजार उपलब्ध कराने के साथ आगे बढ़ने के लिए जरूरी सहयोग भी दिया जाए। इस अभियान से हलवाइयों, कारीगरों और उन परिवारों को भी रोजगार मिलेगा, जिनके पास फिलहाल आय का कोई स्थायी साधन नहीं है। महिला समूह बनाकर भी परिवार अतिरिक्त आमदनी कर सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार ने पारंपरिक कारीगरों, हलवाइयों और घरेलू स्तर पर खाद्य उत्पाद बनाने वाले परिवारों को आर्थिक सहायता देने के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना लागू की है। इसके तहत पात्र लोगों को पांच लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त और गारंटी मुक्त ऋण दिया जा रहा है। साथ ही निर्धारित सब्सिडी का लाभ भी मिलता है। इस सहायता राशि को आगे 7.5 लाख और 10 लाख रुपये तक बढ़ाने की व्यवस्था की जा रही है। बड़े व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक लोगों को योजना के तहत 20 लाख रुपये तक की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास है। इस क्षेत्र में रोजगार सृजन और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने की अपार संभावनाएं हैं। उत्तर प्रदेश खुद में बहुत बड़ा बाजार है। यहां हर मौसम और हर सीजन के अनुसार खाद्य सामग्री और व्यंजन उपलब्ध हैं। जरूरत केवल उन्हें प्रोत्साहित करने और गुणवत्ता बनाए रखने की है।

उत्तर प्रदेश दिवस पर बुलंदशहर की महिला उद्यमी को यूपी गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया

मुख्यमंत्री ने बुलंदशहर की एक महिला उद्यमी का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश दिवस पर उन्हें यूपी गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया था। जब उनके पास कोई काम नहीं था तो उन्होंने 500 रुपये उधार लेकर दिल्ली में अचार बनाने का काम शुरू किया। आज वह महिला 'अचार वाली दीदी' के नाम से प्रसिद्ध हैं और बुलंदशहर की करीब 500 महिलाओं को रोजगार दे रही हैं। आगे बढ़ने के लिए इच्छाशक्ति और मेहनत जरूरी है। यदि व्यक्ति में काम करने का संकल्प हो तो उसे मंच और अवसर मिल सकते हैं। ओडीओसी ऐसे ही लोगों को आगे बढ़ने का अवसर देगा। अंत में मुख्यमंत्री ने दैनिक जागरण परिवार को इस अभिनव पहल और सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने समारोह में शामिल हुए प्रदेश के हलवाइयों, कारीगरों और उन परिवारों के सदस्यों का अभिनंदन किया, जो पीढ़ियों से पारंपरिक पाक कला को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश सरकार और दैनिक जागरण मिलकर ओडीओसी अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।

Tags:CM Yogi

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