आचार्य चाणक्य जैसा गुरु होगा तो देश कभी विपन्न नहीं हो सकता : योगी आदित्यनाथ

आचार्य चाणक्य जैसा गुरु होगा तो देश कभी विपन्न नहीं हो सकता : योगी आदित्यनाथ

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने बुधवार काे कहा कि शिक्षा समाज की आधारशिला है और इसके बगैर कुछ भी हो पाना संभव नही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से कहा है कि हमें विकसित भारत की संकल्पना को पूरा करना है। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा के बदले में सरकार आपसे कुछ नहीं चाहती, सिर्फ एक चीज मांगती है कि प्रत्येक शिक्षक बच्चों की पढ़ाई, विद्यालयों की स्वच्छता और उनके सर्वांगीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। विद्यार्थियों के लिए सही मार्ग प्रशस्त करना शिक्षकों का कर्तव्य भी है और राष्ट्रीय दायित्व भी है।

मुख्यमंत्री बुधवार को अपने वाराणसी दौरे के दूसरे दिन पंडित दीनदयाल उपाध्याय हस्तकला संकुल, बड़ा लालपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों तथा शिक्षामित्रों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा का शुभारंभ किया। साथ ही डीबीटी के माध्यम से प्रदेश के लगभग 1.10 करोड़ छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के बैंक खातों में 1320 करोड़ रुपये की धनराशि हस्तांतरित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षकों के कैशलेस इलाज पर प्रतिवर्ष लगभग 450 करोड़ रुपये खर्च करेगी और इसका पूरा वहन राज्य सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों के स्वास्थ्य की चिंता कर रही है ताकि वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ नई पीढ़ी का भविष्य संवार सकें। क्योंकि आचार्य चाणक्य जैसा गुरु होगा तो देश कभी विपन्न नहीं हो सकता,विदेशी ताकतें भी आंखें उठाकर नहीं देख सकतीं है। उत्तर प्रदेश की बहुत सी योजनाएं ऐसी है जो देश में रोल माडल है। आज विद्यालयों को प्रोजेक्ट अलंकार के तहत विकसित किया जा रहा है। प्रदेश के शिक्षक देशभर में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रहे हैं। अरुणाचल प्रदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां के सांसद ने उन्हें बताया कि राज्य में बड़ी संख्या में शिक्षक उत्तर प्रदेश से हैं। इसी प्रकार मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी उत्तर प्रदेश के शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं तीन महीने तक चलती थीं, जबकि अब शिक्षकों के सहयोग से मात्र 15 दिनों में परीक्षाएं संपन्न हो रही हैं और समयबद्ध तरीके से परिणाम भी घोषित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने पिछले नौ वर्षों में परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सरल और नकलमुक्त बनाया है। शिक्षा के क्षेत्र में हुए सुधारों का ही परिणाम है कि अब प्रदेश के विद्यार्थियों और युवाओं को पहचान के संकट का सामना नहीं करना पड़ता। शिक्षा का उन्नयन हुआ तो प्रदेश के विकास ने भी रफ्तार पकड़ ली हैं। मुख्यमंत्री ने योजना के शुभारंभ पर शिक्षकों और उनके परिवारों को बधाई देते हुए कहा कि इस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से लगभग 12 लाख शिक्षक लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि स्थायी शिक्षक एवं कर्मचारियों को 10 लाख रुपये का ग्रुप टर्म इंश्योरेंस, एक करोड़ रुपये का पर्सनल एक्सीडेंट कवर, एक करोड़ रुपये का स्थायी दिव्यांगता बीमा कवर तथा 1.60 करोड़ रुपये तक का एयर एक्सीडेंट बीमा कवर मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 10 हजार रुपये से अधिक वेतन पाने वाले संविदा कर्मचारियों को भी 30 लाख से 80 लाख रुपये तक का पर्सनल एक्सीडेंट बीमा मिलेगा, जबकि 10 हजार रुपये से कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को दो लाख रुपये का दुर्घटना बीमा प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी शिक्षक या कर्मचारी के साथ कोई अनहोनी होती है तो उनके बच्चों की शिक्षा और बेटियों के विवाह के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। आज हर शिक्षक, शिक्षामित्र और अनुदेशक को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी हम दे रहे हैं। देश में यूपी पहला राज्य है, जहां यह व्यवस्था लागू हो रही है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की उपस्थिति में लगभग 10 लाख शिक्षकों और संविदा कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर चयनित स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों के 12 प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि बेसिक शिक्षा परिषद के प्रत्येक छात्र को यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, स्वेटर, बैग और अन्य आवश्यक सामग्री के लिए 1200 रुपये की सहायता सीधे अभिभावकों के खातों में भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों और शिक्षकों की साझा जिम्मेदारी है कि प्रत्येक बच्चा नियमित रूप से विद्यालय पहुंचे और ‘निपुण भारत’ अभियान के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करे। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को स्वच्छता, अनुशासन और विद्यालयी जीवन की अच्छी आदतों के प्रति जागरूक करने का भी आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने विद्यालयों के प्रति कृतज्ञता का भाव रखते हुए सभी को उन्हें और बेहतर बनाने में योगदान देना चाहिए।

कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री संदीप सिंह, माध्यमिक शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री गुलाब देवी, कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।