कांग्रेस हाईकमान का बड़ा कदम, पंजाब की गुटबाजी सुलझाने पहुंचे भूपेश बघेल

कांग्रेस हाईकमान का बड़ा कदम, पंजाब की गुटबाजी सुलझाने पहुंचे भूपेश बघेल

पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ दिनों से जारी अंदरूनी कलह और नेताओं के बीच बढ़ते असंतोष को देखते हुए पार्टी नेतृत्व अब सक्रिय हो गया है। इसी सिलसिले में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल सोमवार को चंडीगढ़ पहुंच सकते हैं। उनके दौरे को संगठन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि वह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। इसके अलावा नाराज नेताओं से भी बातचीत कर उनकी शिकायतें सुनेंगे और संगठन में चल रही गुटबाजी को खत्म करने की कोशिश करेंगे। चर्चाएं यह भी हैं कि भूपेश बघेल पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से भी मुलाकात कर सकते हैं। इन बैठकों के बाद वह पूरी स्थिति का आकलन कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट कांग्रेस हाईकमान को सौंपेंगे, जिसके आधार पर पंजाब कांग्रेस में आगे की रणनीति तय की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार प्रियंका गांधी की ओर से भेजे गए दो वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने भी हाल ही में पंजाब के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर संगठन की मौजूदा स्थिति का फीडबैक लिया है। दोनों नेता अपनी अलग रिपोर्ट हाईकमान को सौंपेंगे। गौरतलब है कि पहले भी भूपेश बघेल की सिफारिश पर पंजाब कांग्रेस में किसी बड़े संगठनात्मक बदलाव को टाल दिया गया था। ऐसे में उनका यह दौरा आगामी राजनीतिक रणनीति और संभावित फेरबदल के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को पूरी तरह एकजुट किया जाए और किसी भी तरह की गुटबाजी को समाप्त किया जाए।

इस बीच पूर्व मंत्री रजिया सुल्ताना के पति और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद मुस्तफा ने कांग्रेस हाईकमान को एक खुला पत्र लिखकर मौजूदा प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को अपने पद से हट जाना चाहिए ताकि संगठन में नई ऊर्जा और विश्वास कायम हो सके। मुस्तफा ने हाईकमान से अपील की कि पंजाब में जारी राजनीतिक असंतोष को खत्म करने के लिए जल्द और निर्णायक फैसला लिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में नेतृत्व का चयन केवल योग्यता और संगठनात्मक क्षमता के आधार पर होना चाहिए। राजनीतिक गलियारों में मुस्तफा को पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू का करीबी माना जाता है, इसलिए उनके बयान को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उधर, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और कांग्रेस विधायक बलविंदर सिंह धालीवाल ने भी पार्टी नेताओं से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत मतभेद, गुटबाजी और आपसी विवादों को भुलाकर संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए। उनका कहना है कि यदि कांग्रेस आंतरिक मतभेदों में उलझी रही तो भाजपा और आम आदमी पार्टी को राजनीतिक फायदा मिलेगा। कांग्रेस हाईकमान ने भी सभी नाराज नेताओं को भरोसा दिलाया है कि उनकी हर बात गंभीरता से सुनी जाएगी और सभी पक्षों से चर्चा के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा। पार्टी का लक्ष्य वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को पूरी तरह मजबूत, एकजुट और चुनावी मुकाबले के लिए तैयार करना है।