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रुपये की कीमत में लगातार गिरावट पर जानिए क्या है विशेषज्ञों की राय ?

rupee falling

नई दिल्ली। मुद्रा बाजार में रुपया (Rupee) लगातार कमजोरी का प्रदर्शन कर रहा है। डॉलर (Dollar) के मुकाबले रुपये की कीमत गिरकर 78 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से भी नीचे जा चुकी है। आज भी भारतीय मुद्रा ने 78.13 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से कारोबार की शुरुआत की और दिन के पहले कारोबारी सत्र के अंत तक गिरकर 78.17 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक आ गया। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है की मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के कारण रुपये की कीमत में अभी और गिरावट आने की आशंका बनी हुई है। अगर जल्द ही वैश्विक हालात नहीं सुधरे, तो डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा 80 रुपये के स्तर तक भी गिर सकती है।

मुद्रा बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर दुनिया के ज्यादातर देशों में महंगाई चरम स्तर तक पहुंच गई है। अमेरिका में महंगाई ने पिछले 40 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस जबरदस्त महंगाई के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। महंगाई पर काबू पाने के लिए भारत में रिजर्व बैंक समेत दुनिया के ज्यादातर देशों के केंद्रीय बैंकों ने भी ब्याज दर में बढ़ोतरी करने का रास्ता अपनाया है, लेकिन महंगाई पर काबू पाने के लिए अपनाए गए अमेरिकी फेडरल रिजर्व के इस तरीके की वजह से भारतीय मुद्रा संकट में पड़ गई है।

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मार्केट एक्सपर्ट मयंक मोहन के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में बढ़ोतरी किए जाने के कारण दुनिया के अन्य शेयर बाजारों (Share Market) की तरह ही भारतीय शेयर बाजार से भी अमेरिकी निवेशकों ने अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया है। ऐसा होने के कारण शेयर बाजार में तो गिरावट का रुख बना ही है, भारतीय मुद्रा बाजार में भी डॉलर की मांग काफी तेज हो गई है। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने की वजह से डॉलर में भी मजबूती का रुख बन गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की मजबूती और भारतीय मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग में तेजी आने के कारण भारतीय मुद्रा पर काफी दबाव की स्थिति बन गई है।

इसी तरह मुद्रा बाजार के जानकार आशीष जैन का कहना है कि अमेरिका में मुद्रास्फीति की दर में आई तेजी और उससे निपटने के लिए फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने के कारण ज्यादातर अमेरिकी निवेशक बाजार में पैसा लगाने का जोखिम लेने से बचने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध की शुरुआत के बाद से ही विदेशी निवेशक अपना पैसा सबसे सुरक्षित निवेश माध्यमों में लगाने की कोशिश करने लगे हैं।

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अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में की गई बढ़ोतरी के बाद इन निवेशकों के लिए अमेरिका में गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में निवेश करना सबसे सुरक्षित निवेश माध्यम बन गया है। हालांकि उन्हें ऐसे निवेश से तुलनात्मक रूप से कम रिटर्न मिलता है, लेकिन इसमें उन्हें शेयर बाजार के जोखिम का सामना नहीं करना पड़ता है। आशीष जैन के मुताबिक ऐसी स्थिति में विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में पैसा लगाने की बजाए भारतीय बाजार में पहले से लगा अपना पैसा निकालने की कोशिश में लग गए हैं।

आपको बता दें कि भारतीय शेयर बाजार में भले ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली भारतीय मुद्रा में होती है, लेकिन इस भारतीय मुद्रा को विदेशी निवेशक अमेरिकी मुद्रा यानी डॉलर में एक्सचेंज करके वापस अपने साथ ले जाते हैं। ऐसा होने के कारण अमेरिकी डॉलर की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। इसका असर डॉलर की बढ़ती कीमत और रुपये की लगातार कमजोरी के रूप में साफ नजर आ रहा है।