रंगभरी एकादशी कब है?, जानें पूजा विधि एवं महत्व

रंगभरी एकादशी कब है?, जानें पूजा विधि एवं महत्व

सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। इस तिथि पर भगवान विष्णु को समर्पित व्रत किया जाता है। साथ ही विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। हर महीने में दो बार एकादशी का व्रत रखा जाता है, जिसका अलग-अलग महत्व शास्त्रों में बताया गया है। ऐसे ही फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की आने वाली रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi) बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi) के दिन भगवान विष्णु के साथ ही भोलेनाथ की पूजा की जाती है। मान्यतता है कि इस दिन दोनों देवों की पूजा-अर्चना करने से मन की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं, तो आइए जानते हैं कि इस साल रंगभरी एकादशी कब मनाई जाएगी? साथ ही जानते हैं इसकी पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व।
रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi) कब है?
फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की एका (दशी तिथि की शुरुआत 27 फरवरी को मध्यरात्रि 12 बजकर 33 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन 27 फरवरी को रात 10 बजकर 32 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, इस साल रंगभरी एकादशी 27 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। रंगभरी एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi) 2026 पूजा शुभ मुहूर्त
रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi) का पूजा मुहूर्त 27 फरवरी को सुबह 06 बजकर 48 मिनट पर शुरू होगा। ये सुबह 11 बजकर 08 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में एकादशी की पूजा की जा सकती है। वहीं इस दिन ब्रह्म मुहूर्त पूजा का समय सुबह 05 बजकर 09 मिनट पर शुरू होगा ये 05 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगा। ये दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। रंगभरी एकादशी की पूजा के लिए ब्रह्म और अभिजीत मुहूर्त भी शुभ रहता है।
रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi) पूजा विधि
रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi) के दिन प्रात:काल सूर्योदय से पहले उठें। फिर स्नान-ध्यान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसक बाद इस पावन व्रत का संकल्प करें। फिर एक तांबे के लोटे में गंगाजल लेकर भगवान शिव को चढ़ाएं। फिर उनको शमी और बेलपत्र अर्पित करें। उनको अबीर-गुलाल अर्पित करें। उनके सामने धूप-दीप जलाएं। उन्हें फल-फूल और इत्र चढ़ाएं। इसके बाद देवों के देव महादेव के मंत्रों का जप रुद्राक्ष की माला से करें। आरती के साथ पूजा का समापन करें।
रंगभरी एकादशी (Rangbhari Ekadashi) का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन ही विवाह के बाद महादेव मां पार्वती के साथ पहली बार काशी आए थे। उस समय देवताओं और गणों ने उनके स्वागत में दीपक जलाए थे। आरती की थी। साथ ही फूल, गुलाल और अबीर उड़ाया था। इसके बाद से ही काशी में इस तिथि के दिन शिव जी और पार्वती जी की पूजा के साथ उनके साथ होली खेली जाने लगी और इसे रंगभरी एकदशी के रूप में मनाया जाने लगा।