सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ (Ghooskhor Pandat) के फिल्ममेकर नीरज पांडे (Filmmaker Neeraj Pandey) को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि ऐसे टाइटल का इस्तेमाल करके समाज के एक हिस्से को बदनाम नहीं कर सकते हैं।
मनोज बाजपेयी की अपकमिंग फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ (Ghooskhor Pandat) अपने टाइटल के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में वकील विनीत जिंदल ने ये याचिका दायर की थी। फिल्म के फर्स्ट लुक के बाद ही नाम को लेकर बवाल शुरू हो गया था, इस टाइटल को ब्राह्मण समुदाय के विरुद्ध अपमानजनक बताया गया था। जिसके बाद नेटफ्लिक्स ने दिल्ली हाई कोर्ट में जानकारी दी थी कि फिल्म का नाम बदला जा रहा है। उससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जो भी कंटेंट था, उसे भी हटा दिया गया है।
‘घूसखोर पंडत’ (Ghooskhor Pandat) मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सभी को संविधान में है। लेकिन इसकी सीमाएं हैं और इस तरह का नाम नहीं दे सकते। हालांकि, वकील की तरफ से कहा गया है कि- यह मामला हाईकोर्ट में भी है और अभी फिल्म का नाम भी तय नहीं किया गया है। जिसे लेकर जस्टिस नागरत्ना ने मेकर्स को फटकार लगाते हुए कहा कि आपको क्या इन शब्दों का मतलब नहीं पता था। अगर आप क्लियर नहीं करते कि ऐसा जानबूझकर नहीं किया गया, तो हम फिल्म रिलीज नहीं होने देंगे।
हालांकि इस दौरान वकील ने कहा कि, वो पिक्चर (Ghooskhor Pandat) का टाइटल बदल रहे हैं। जिसे लेकर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि जानबूझकर बहुत से समुदायों को टारगेट किया जा रहा है। किसी को व्यक्तिगत तौर पर आप कैसे टारगेट कर सकते हैं। हम सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि देश की एकता, कानून व्यवस्था और मोरैलिटी को लेकर चिंतित है। हालांकि, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगले हफ्ते तक मेकर्स को जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। बताते चलें कि इस मामले में अगले गुरुवार यानी 19 फरवरी को सुनवाई की जाएगी।
क्या आपको इन शब्दों का मतलब नहीं पता था… सुप्रीम कोर्ट ने ‘घूसखोर पंडत’ के मेकर्स को लगाई फटकार
