लखनऊ/मथुरा: उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या-काशी-प्रयागराज (स्पिरिचुअल ट्रायंगल) के बाद अब भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा-वृन्दावन को विशिष्ट पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वृन्दावन का परिक्रमा मार्ग (Vrindavan Parikrama Marg) अब और अधिक आकर्षक व सुव्यवस्थित नजर आएगा, क्योंकि सरकार ने यहां भवनों के फसाड विकास और आधुनिक साइनेज जैसे कार्यों के लिए बड़ी सौगात दी है। राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 21.28 करोड़ रुपए की मंजूरी प्रदान करते हुए प्रथम किश्त के रूप में 10.90 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘यह पहल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव देने के साथ ही धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।’ मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल मार्गदर्शन में मथुरा को विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। वृन्दावन परिक्रमा मार्ग (Vrindavan Parikrama Marg) पर स्थित भवनों के बाहरी स्वरूप (फसाड) को विकसित करने, मार्गदर्शन हेतु आधुनिक साइनेज लगाने और समग्र सौंदर्यीकरण के कार्य को धरातल पर उतारने की तैयारी है।
परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण को सौंपी गई है, जो इस कार्य को निर्धारित मानकों के अनुसार पूरा करेगा।’ ब्रज की पारंपरिक छटा से निखरेगा परिक्रमा मार्ग वृन्दावन परिक्रमा मार्ग को और अधिक भव्य, सुव्यवस्थित और आकर्षक स्वरूप देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसके तहत परिक्रमा मार्ग के किनारे स्थित भवनों पर आकर्षक फसाड विकसित किए जाएंगे। इस योजना के अंतर्गत मार्ग पर स्थित भवनों, दरवाजों और दीवारों को पारंपरिक ब्रज शैली में सजाया-संवारा जाएगा।
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पूरे मार्ग पर स्पष्ट, आधुनिक और दिशा-सूचक साइनेज लगाए जाएंगे, जिससे आवागमन और मार्गदर्शन आसान हो सके। इसके साथ ही सम्पूर्ण परिक्रमा मार्ग को एकरूपता और स्थानीय सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप सजाया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव के साथ-साथ मनोहारी वातावरण भी प्राप्त हो सके।
*परिक्रमा मार्ग से गुजरते हैं हजारों श्रद्धालु*
वृन्दावन परिक्रमा मार्ग (Vrindavan Parikrama Marg) करीब 10-12 किलोमीटर का एक पवित्र मार्ग है, जो कृष्ण भक्त और श्रद्धालु नंगे पैर राधा-कृष्ण के मंत्रों का जाप करते हुए पूरा करते हैं। यह मार्ग यमुना किनारे के प्राचीन घाटों, प्रमुख मंदिरों (बांके बिहारी, निधिवन, गोविंद देव) सहित पवित्र स्थलों से होकर गुजरता है। परिक्रमा में श्रद्धालुओं को 3-4 घंटे का समय लगता है। परिक्रमा को आमतौर पर इस्कॉन मंदिर या गोविंद देव जी मंदिर से शुरू और समाप्त किया जाता है। यह मार्ग उन स्थानों से होकर गुजरता है जहां कृष्ण ने ग्वाल-बालों के साथ लीलाएं की थीं। यह मार्ग स्थानीय पर्यटन को भी गति प्रदान कर रहा है।
मथुरा-वृन्दावन में पर्यटकों की रिकॉर्ड आवक- मंत्री पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार धार्मिक स्थलों के समग्र विकास पर केंद्रित है। भगवान कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा अपनी विशिष्ट धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान के चलते देश-विदेश के पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यही वजह है कि वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 10.24 करोड़ पर्यटकों ने मथुरा का भ्रमण किया, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता और पर्यटन संभावनाओं को दर्शाता है। रंगोत्सव, कृष्ण जन्माष्टमी, राधा अष्टमी सहित अन्य अवसरों पर आगंतुकों की भारी भीड़ उमड़ती है, जिसे ध्यान में रखकर ब्रज क्षेत्र में पर्यटन विकास कार्य किए जा रहे हैं।’
