6 जनवरी को रखा जाएगा सकट चौथ व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और सामग्री लिस्ट

6 जनवरी को रखा जाएगा सकट चौथ व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और सामग्री लिस्ट

सकट चौथ (Sakat Chauth) भगवान गणेश की उपासना का बेहद खास दिन है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं। ये त्योहार भारत के लगभग सभी हिस्सों में मनाया जाता है। इसे संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं। इस व्रत में महिलाएं शाम के समय भगवान गणेश की विधि विधान पूजा करती हैं और साथ ही सकट की कथा सुनती हैं। फिर रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद जल ग्रहण करके अपना व्रत पूरा करती हैं। इस दिन भगवान को गुड़ और तिल से बने लड्डू, शकरकंद और मौसमी फलों का भोग लगाया जाता है। चलिए आपको बताते हैं सकट चौथ की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त।
सकट चौथ (Sakat Chauth) कब है
सकट चौथ व्रत माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है और इस बार ये तिथि 6 जनवरी की सुबह 8 बजे से शुरू होकर 7 जनवरी की सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार ये व्रत 6 जनवरी को रखा जाएगा।
सकट चौथ (Sakat Chauth) की मुख्य पूजा शाम के समय की जाती है। इस पूजा में भगवान गणेश की विधि विधान पूजा करने के साथ सकट चौथ की कथा भी सुनी जाती है।
सकट चौथ के शुभ मुहूर्त
लाभ – उन्नति – 11:09 AM से 12:27 PM
अमृत – सर्वोत्तम – 12:27 PM से 01:45 PM
शुभ – उत्तम – 03:03 PM से 04:21 PM
लाभ – उन्नति – 07:21 PM से 09:03 PM
सकट चौथ (Sakat Chauth) पूजा सामग्री
गणेश जी की प्रतिमा, लाल फूल, 21 गांठ दूर्वा, लकड़ी की चौकी जिस पर गणेश भगवान की प्रतिमा स्थापित करेंगे, जनेऊ, सुपारी, पान का पत्ता, पीला कपड़ा चौकी पर बिछाने के लिए, गाय का घी, दीप, धूप, गंगाजल, मेहंदी, सिंदूर, लौंग, रोली, अबीर, गुलाल, इलायची, अक्षत, हल्दी, मौली, गंगाजल, 11 या 21 तिल के लड्डू, मोदक, फल, कलश, चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए दूध, चीनी, इत्र और सकट चौथ कथा पुस्तक।
सकट चौथ (Sakat Chauth) पूजा विधि
– सकट चौथ व्रत वाले दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्‍नान करें और फिर साफ वस्‍त्र पहनें।
संभव हो तो इस दिन लाल रंग के वस्‍त्र पहनें।
– स्‍नान के बाद आप पूजा आरंभ करें और हाथ में अक्षत और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।
इसके बाद भगवान गणेश को ये अक्षत और पुष्‍प चढ़ा दें।
– पूजा के स्थान पर गुड़ और तिल के लड्डू, शकरकंद, धूप, चंदन, तांबे के एक कलश में जल और मौसमी फल जरूर रखें।
– पूजा के स्थान पर माता दुर्गा की प्रतिमा भी जरूर रखें।
– इस व्रत की मुख्य पूजा शाम में होती है इसलिए शाम की पूजा से पहले फिर से स्नान कर लें।
– फिर भगवान की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
– देवी-देवताओं को तिलक लगाएं और जल अर्पित करें।
– भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें। फिर सकट चौथ की कथा सुनें।
– कथा के बाद भगवान गणेश की आरती करें और उन्हें भोग लगाएं।
– फिर रात में चांद को अर्घ्य देकर भोग लगाएं।
– चांद की पूजा के बाद अपना व्रत खोल लें।
सकट चौथ (Sakat Chauth) पर चांद की पूजा कैसे करें
चांद निकलने के बाद सबसे पहले चांद को अर्घ्य दें। इस बात का ध्यान रखें कि चांद को अर्घ्य देने वाले जल में थोड़ा सा गंगाजल, थोड़ा कच्चा दूध, सफेत तिल, अक्षत और फूल जरूर होना चाहिए। अर्घ्य के बाद चांद को धूप-दीप दिखाएं। इसके बाद भोग लगाकर तीन बार परिक्रमा की जाती है।