सिख विरासत को सम्मान, इस राज्य के ‘पवित्र शहर’ बने नशा-मुक्त ज़ोन

सिख विरासत को सम्मान, इस राज्य के ‘पवित्र शहर’ बने नशा-मुक्त ज़ोन

पंजाब (Punjab) में भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार ने अब सिख पंथ की पुरानी मांगों को पूरा किया है। आज भगवंत सिंह मान सरकार को पंजाब में सिख विरासत की सच्ची संरक्षक सरकार के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि सिख आस्था और पवित्रता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
सिख पंथ के तीन सबसे महत्वपूर्ण तख़्तों से जुड़े शहरों-श्री अकाल तख़्त साहिब (अमृतसर) का आंतरिक शहर, तख़्त श्रीकेसगढ़ साहिब (श्रीआनंदपुर साहिब) और तख़्त श्रीदमदमा साहिब (तलवंडी साबो) को पवित्र शहर का आधिकारिक दर्जा देना भगवंत सिंह मान सरकार का एक ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है। इन शहरों में अब शराब, तंबाकू, मांस और नशीले पदार्थों की बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू है।
धार्मिक समागमों के प्रबंधन में भी सरकार ने महत्वपूर्ण कार्य किए। श्री फतेहगढ़ साहिब में शहीदी सभा के आयोजनों का सुव्यवस्थित प्रबंध किया गया। भगवंत सिंह मान ने व्यक्तिगत रूप से प्रशासन के साथ बैठकें कीं। लाखों की संख्या में पहुंची संगत के लिए सुरक्षा और यातायात के सुचारू प्रबंध किए गए। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएँ की गईं।
सिख सम्मान से जुड़े मुद्दों पर भगवंत सिंह मान सरकार ने स्वयं को केवल राज्य तक सीमित नहीं रखा। जब भी विदेशों में सिख समुदाय के सम्मान और अधिकारों से जुड़े सवाल उठे, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने केंद्र सरकार के समक्ष इन मुद्दों को पूरी मजबूती से रखा और कठोर कार्रवाई की माँग की। इससे सिख संगत में यह विश्वास और मजबूत हुआ कि पंजाब सरकार हर मंच पर उनके सम्मान के लिए खड़ी है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी सरकार का यह कार्यकाल सिख धर्म के सम्मान, शहीदी की परंपरा की रक्षा और विरासत की संरक्षा के लिए एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। यह दौर सिद्ध करता है कि जब नेतृत्व ईमानदार हो और नीयत साफ़ हो, तो राजनीति भी विश्वास और सेवा का माध्यम बन सकती है। आज पंजाब में एक बात स्पष्ट दिखाई दे रही है, सिख संगत की आवाज़ सुनी जा रही है और इतिहास में भगवंत सिंह मान सरकार का नाम एक सम्मानजनक अध्याय के रूप में दर्ज हो रहा है।