जेवर। उत्तर प्रदेश का नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) देश के एविएशन सेक्टर में एक नए युग की शुरुआत करने जा रहा है। यहां अत्याधुनिक मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (एमआरओ) हब विकसित किया जा रहा है, जिसका शिलान्यास शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। यह परियोजना न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश को विमान रखरखाव के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।
एमआरओ में आत्मनिर्भरता जरूरी-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर बताया कि भारत अभी विमान रखरखाव के मामले में काफी हद तक विदेश पर निर्भर है। देश के लगभग 85% विमान अभी मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल के लिए विदेश भेजे जाते हैं, जिससे बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर जाती है। उन्होंने इस स्थिति को बदलने पर जोर देते हुए कहा कि भारत को एमआरओ सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाना समय की आवश्यकता है और इसके लिए देशभर में आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
अकासा एयर के साथ रणनीतिक साझेदारी-
नोएडा एयरपोर्ट (Noida International Airport) परिसर में अकासा एयर के सहयोग से पहली एमआरओ सुविधा स्थापित की जाएगी। यह अत्याधुनिक केंद्र विमान रखरखाव, मरम्मत और तकनीकी सेवाओं का व्यापक नेटवर्क तैयार करेगा, जिससे देश की एविएशन इंडस्ट्री को नई मजबूती मिलेगी। इस एमआरओ हब के विकसित होने से एयरलाइंस कंपनियों को अब अपने विमानों को विदेश भेजने की आवश्यकता कम होगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि परिचालन लागत में भी भारी कमी आएगी। भारत में ही विश्वस्तरीय मेंटेनेंस सुविधाएं उपलब्ध होने से देश वैश्विक एविएशन सर्विस मार्केट में प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।
रोजगार और स्किल डेवलपमेंट को मिलेगा बढ़ावा-
यह परियोजना स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न करेगी। युवाओं को एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, एविएशन टेक्नोलॉजी और तकनीकी सेवाओं में प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निवेश-प्रोत्साहन नीतियों के चलते प्रदेश में इस तरह की हाईटेक परियोजनाओं का तेजी से विकास हो रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश युवाओं के लिए अवसरों का केंद्र बनता जा रहा है।
एविएशन और लॉजिस्टिक्स हब बनने की दिशा में बड़ा कदम-
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) को केवल एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि एक समग्र एविएशन और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। एमआरओ सुविधा इस विजन का अहम हिस्सा है, जो प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एमआरओ सेक्टर को “आत्मनिर्भर भारत” अभियान का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि आने वाले समय में भारत न केवल अपने विमानों की सर्विसिंग करेगा, बल्कि दुनिया के अन्य देशों को भी सेवाएं प्रदान कर सकेगा।
भारत में तेजी से उभर रहा है एमआरओ सेक्टर-
नोएडा एयरपोर्ट (Noida International Airport) में यह सुविधा स्थापित होने के साथ ही भारत में एमआरओ सेक्टर तेजी से विकास करेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार 2030 तक इसका बाजार 5.7 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। भारत सरकार की एमआरओ नीति 2021 के तहत करों में रियायत और भूमि पट्टे में छूट देकर घरेलू क्षमताओं को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भारत को वैश्विक एमआरओ हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी आई है।
यूएसए है अग्रणी देश-
वैश्विक स्तर पर एमआरओ सुविधाएं प्रमुख विमानन हब का अहम हिस्सा हैं, जहां अमेरिका सबसे अधिक एमआरओ कंपनियों के साथ अग्रणी है, जबकि यूके, फ्रांस व जर्मनी यूरोप के प्रमुख केंद्र हैं। एशिया-प्रशांत में सिंगापुर, चीन, भारत और फिलीपींस, जबकि मध्य पूर्व में यूएई महत्वपूर्ण एमआरओ हब के रूप में उभर रहे हैं।
