उप्र के विकास को नई ऊंचाई प्रदान करेगा नोएडा एयरपोर्ट

उप्र के विकास को नई ऊंचाई प्रदान करेगा नोएडा एयरपोर्ट

नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Noida International Airport) देश की प्रमुख ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में से एक है। यात्री सेवाओं के अलावा यहां एक मजबूत कार्गो इकोसिस्टम भी होगा, जिससे लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को काफी मजबूती मिलेगी। यह एयरपोर्ट भारत को ग्लोबल एविएशन हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह उत्तर प्रदेश के विकास को नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा।
यमुना विकास प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी शैलेंद्र भटियां ने बताया कि पहले चरण को लगभग 11,200 करोड़ रुपये की लागत से सरकार और प्राइवेट कंपनी ने मिलकर (पीपीपी मॉडल) तैयार किया है। शुरुआत में यह एयरपोर्ट सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा, जिसे भविष्य में 7 करोड़ तक बढ़ाया जा सकता है। यह एयरपोर्ट सड़क, रेल और मेट्रो से सीधे जुड़ा होगा, जिससे दिल्ली-एनसीआर, आगरा और मथुरा जैसे शहरों के यात्रियों को फायदा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि नोएडा एयरपोर्ट (Noida International Airport) के शुरू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर के लोगों को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के अलावा एक अन्य विकल्प मिलेगा। इससे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दबाव कम होगा। यात्रियों को नोएडा-ग्रेटर नोएडा से पालम आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उन्होने बताया कि यहां उड़ान अप्रैल से शुरू होने की संभावना है। देश के 60 से 65 प्रमुख शहरों के लिए नोएडा एयरपोर्ट (Noida International Airport) से विमानों की उड़ान होगी। एयरपोर्ट का रनवे 3900 मीटर लंबा है। रनवे पर बड़े जहाज भी लैंडिंग कर सकते हैं। यहां कार्गो (सामान लाने-ले जाने) की भी सुविधा है।