चैत्र नवरात्रि चल रही है। इसका समापन 27 मार्च को होगा। आज नवरात्रि का पांचवां दिन है। नवरात्रि में माता दुर्गा के नौ रूपों का विधि-विधान से पूजन (Kanya Pujan) और व्रत किया जाता है। नवरात्रि के इन नौ दिनों में अष्टमी तिथि विशेष महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसे महाअष्टमी या दुर्गा अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन मां के आठवें स्वरूप, मां महागौरी को समर्पित किया गया है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि में महाअष्टमी 26 मार्च को पड़ रही है। परंपरानुसार, इस दिन कन्या पूजन (Kanya Pujan) किया जाता है। इस दिन 2 से 10 वर्ष की कन्याओं की पूजा की जाती है। उन्हें श्रद्धापूर्वक भोजन कराया जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि में कन्या पूजन करने और कन्याओं को खाना खिलाने से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती हैं, लेकिन कन्या पूजन के समय कुछ जरूरी सावधानियां भी बरती जाती हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
चैत्र नवरात्रि महाअष्टमी तिथि
दृक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 25 मार्च 2026 को दोपहर 01 बजकर 50 मिनट पर शुरू हो रही है। इस तिथि का समापन 26 मार्च 2026 को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, दुर्गा अष्टमी और कन्या पूजन 26 मार्च 2026 को किया जाएगा।
कन्या पूजन (Kanya Pujan) शुभ मुहूर्त
महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन (Kanya Pujan) के लिए पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 18 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।
दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 55 मिनट से दोपहर 3 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
कन्या पूजन (Kanya Pujan) के समय बरतें ये सावधानियां
कन्या पूजन (Kanya Pujan) के लिए 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को बुलाएं। नवरात्रि में 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं का पूजन ही श्रेष्ठ होता है।कन्याओं के घर आने पर सबसे पहले उनके पैर धोकर उन्हें बैठने के लिए आसन दें। कन्याओं को भोजन कराते समय मानसिक और शारीरिक रूप से स्वयं को शुद्ध रखें।
इस बात का ध्यान रखें कि कन्याओं के लिए तैयार भोजन (हलवा, पूड़ी, चना) पूरी तरह सात्विक रहे। इसमें भूलकर भी प्याज या लहसुन न डालें। सभी कन्याओं को एक समान आदर दें। कन्याओं को भोजन के लिए मजबूर न करें, वे जितना प्रेम से खाएं उतना ही खिलाएं। विदाई के समय उनके पैर छूकर आशीर्वाद अवश्य लें।
महाअष्टमी: कन्या पूजन में भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना मानो जाएंगी नाराज
