यूपी में मदिरा प्रेमियों को झटका! बढ़ेंगी शराब की कीमतें

यूपी में मदिरा प्रेमियों को झटका! बढ़ेंगी शराब की कीमतें

उत्तर प्रदेश सरकार ने शराब (Liquor) उद्योग को नई दिशा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बुधवार को कैबिनेट ने नई आबकारी नीति और आबकारी निर्यात नीति को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत घरेलू बाजार में देशी शराब के दाम बढ़ेंगे, जबकि विदेशी बाजार में यूपी की शराब को बढ़ावा देने की तैयारी की गई है। इस नीति से राज्य के राजस्व में भारी वृद्धि की उम्मीद है, साथ ही किसानों और उद्योग को फायदा पहुंचेगा।
नई नीति के अनुसार 1 अप्रैल से 36 प्रतिशत अल्कोहल वाली देशी शराब (Liquor) की ड्यूटी 165 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 173 रुपये कर दी गई है। इससे बोतल के दाम में औसतन 5 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, अन्य श्रेणियों की शराब के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
विदेशी शराब की फुटकर दुकानों के राजस्व में 7.5 प्रतिशत का इजाफा किया गया है। आबकारी विभाग ने वर्ष 2026-27 के लिए 71,278 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य तय किया है, जिसमें देशी शराब के दाम बढ़ने से करीब 1,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त योगदान आएगा।
इन इलाकों का घटेगा कोटा
शहरी क्षेत्रों में देशी शराब (Liquor) की खपत कम होने के चलते इन इलाकों का कोटा घटाया जाएगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों की दुकानों का कोटा बढ़ाया जाएगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों में लो अल्कोहल स्ट्रेंथ वाले पेय जैसे बीयर, वाइन और रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) के लिए बार लाइसेंस दिए जाएंगे। यह कदम पर्यटन और युवा उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
भांग की दुकानों का लाइसेंस भी महंगा
भांग की दुकानों की लाइसेंस फीस में 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जबकि वाइन और कम तीव्रता वाले पेय पर प्रतिफल शुल्क कम कर दिया गया है। इन पर मात्र 0.1 प्रतिशत सांकेतिक ड्यूटी लगाई गई है, ताकि फल उत्पादक किसानों को आर्थिक लाभ हो सके।
नीति का सबसे आकर्षक हिस्सा निर्यात प्रोत्साहन है। आबकारी आयुक्त डॉ। आदर्श सिंह के अनुसार, यूपी देश का पहला राज्य है जिसने आबकारी निर्यात नीति लागू की है। इससे एथनॉल, शराब और संबंधित उत्पादों का विदेशी बाजार में निर्यात बढ़ेगा।
बोतल भराई शुल्क, निर्यात पास फीस, फ्रेंचाइजी फीस और स्पेशल फीस को न्यूनतम स्तर पर लाया गया है। ब्रांड पंजीकरण और लेबल अनुमोदन के नियमों को शिथिल किया गया है। अन्य राज्यों को शीरा आधारित एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ENA) के निर्यात पर फीस को 0.50 रुपये प्रति बल्क लीटर तक घटाया गया है। हेरिटेज मदिरा के निर्माण, टेस्टिंग टैवर्न और फुटकर बिक्री की अनुमति भी दी गई है।
और क्या होगा असर?
इस नीति से डिस्टिलरी, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात सेवाओं का विस्तार होगा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूपी की शराब (Liquor) की मौजूदगी मजबूत होगी, जो देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने में मदद करेगी। थोक कारोबार में मोनोपोली को रोकने के लिए नियमों में ढील दी गई है, और अब डिस्टिलरी या कोई भी कारोबारी इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकेगा। लाइसेंस फीस अब उठान के आधार पर ली जाएगी।
सरकार का मानना है कि ये बदलाव शराब उद्योग को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाएंगे, साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। हालांकि, दाम बढ़ने से आम उपभोक्ताओं पर कुछ बोझ पड़ेगा, लेकिन निर्यात से होने वाले लाभ से इसे संतुलित किया जा सकेगा।