CM योगी का जाली लेटर और BJP टिकट की चाहत, कोर्ट ने जालसाज को ठहराया दोषी

CM योगी का जाली लेटर और BJP टिकट की चाहत, कोर्ट ने जालसाज को ठहराया दोषी

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक शख्स को भारतीय जनता पार्टी का टिकट हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम का फर्जी लेटर इस्तेमाल कर चुनाव ने लड़ने के लिए टिकट मांगने के मामले में दोषी ठहराया है। राउज़ एवेन्यू कोर्ट्स की एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ज्योति माहेश्वरी ने कहा कि ये सरकारी अधिकारियों के नामों का गलत इस्तेमाल करके बनाए गए ऑफिशियल कामों में लोगों के भरोसे की बुनियाद पर चोट करता है।
कोर्ट ने कहा कि सरकारी अधिकारियों के नामों का गलत इस्तेमाल अक्सर मामूली बात मानकर टाल दिया जाता है, लेकिन जब यह किसी जाली सरकारी काम का रूप ले लेता है। तो यह जनता के भरोसे की नींव पर ही चोट करता है। कोर्ट ने आरोपी शिवाजी यादव को इंडियन पीनल कोड, 1860 के सेक्शन 465 (जालसाजी) और 471 (जाली डॉक्यूमेंट या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को असली के तौर पर धोखाधड़ी या बेईमानी से इस्तेमाल करना) के तहत सजा के लायक अपराधों के लिए दोषी ठहराया।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल यह मामला 10 जून 2019 के एक लेटर से शुरू हुआ, जो कथित तौर पर योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लखनऊ कैंट चुनाव क्षेत्र से आरोपी के लिए BJP टिकट की सिफारिश करते हुए लिखा था। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय ने लेटर को संदिग्ध बताया जिससे CBI जांच शुरू हुई। जांच से पता चला कि लेटर जाली था और मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी नहीं किया गया था। आरोपी को दोषी ठहराते हुए कोर्ट ने माना कि उसने जाली लेटर बनाया था और यह जानते हुए भी कि यह जाली और झूठा है। उसने इसे PMO को असली डॉक्यूमेंट के तौर पर भेजा था।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि CBI की जांच ऊपर बताए गए पहलुओं पर पूरी हो गई है और की गई जांच और रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों के आधार पर आरोपी शिवाजी यादव का गुनाह बिना किसी शक के साबित हो गया है। आदेश में यह भी कहा गया कि इस मामले से पता चला है कि एक संवैधानिक अधिकारी के नाम और ऑफिस का इस्तेमाल करके एक मनगढ़ंत कम्युनिकेशन को असली बनाने की जानबूझकर कोशिश की गई थी और ऐसे कामों से ऑफिशियल प्रोसेस और कम्युनिकेशन की पवित्रता को नुकसान पहुंचाने का खतरा है।
कोर्ट ने कहा कि इसलिए कानून को अपना काम करना चाहिए, जहां रिकॉर्ड में मौजूद सबूत साफ तौर पर धोखा देने के इरादे से झूठे डॉक्यूमेंट बनाने और इस्तेमाल करने को साबित करते हैं।