हल्द्वानी में सिल्क पार्क की कवायद तेज, केंद्र से मिला सकारात्मक संकेत

हल्द्वानी में सिल्क पार्क की कवायद तेज, केंद्र से मिला सकारात्मक संकेत

नई दिल्ली। उत्तराखंड में रेशम उद्योग को नई गति देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण पहल की है। कृषि मंत्री गणेश जोशी (Ganesh Joshi) ने सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) से मुलाकात कर हल्द्वानी में प्रस्तावित सिल्क पार्क की स्थापना के लिए वित्तीय और तकनीकी सहयोग का अनुरोध किया। केंद्रीय मंत्री ने प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए शीघ्र कार्रवाई और हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

बैठक के दौरान गणेश जोशी ने उत्तराखंड में रेशम उद्योग की वर्तमान स्थिति और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 7,500 रेशम कीटपालक परिवार इस क्षेत्र से जुड़े हैं, जो प्रतिवर्ष 314.40 मीट्रिक टन बाईवोल्टाइन रेशम कोया का उत्पादन कर रहे हैं। इसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 12 करोड़ रुपये है।

उन्होंने केंद्रीय मंत्री को बताया कि देहरादून स्थित सिल्क पार्क के माध्यम से रेशम उत्पादों का मूल्य संवर्धन किया जा रहा है। यहां रेशमी साड़ियां, वास्कोट, स्टॉल, शॉल और अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिनका प्रदेश के विभिन्न बिक्री केंद्रों के माध्यम से विपणन किया जा रहा है। इससे रेशम उत्पादकों और बुनकरों को बेहतर आर्थिक लाभ मिल रहा है। इस पहल की जानकारी पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त की।

कृषि मंत्री ने कहा कि हल्द्वानी में प्रस्तावित सिल्क पार्क से कुमाऊं क्षेत्र में रेशम उद्योग को नई पहचान मिलेगी। इससे अधिक संख्या में बुनकरों को इस क्षेत्र से जोड़ने, उनकी आय बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने केंद्र सरकार से परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी देने और इसके लिए आवश्यक वित्तीय एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

बैठक के अंत में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करने का भरोसा देते हुए कहा कि केंद्र सरकार उत्तराखंड में रेशम उद्योग के विकास के लिए हरसंभव सहयोग करेगी।