अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर (Ram Mandir ) में दानपात्रों से चढ़ावे की राशि और बहुमूल्य संपत्ति के कथित गबन का मामला अब कानूनी चौखट तक पहुंच गया है। इस पूरे प्रकरण की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग को लेकर शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है, जिसपर आगामी सप्ताह में सुनवाई होने की प्रबल संभावना है। स्थानीय अधिवक्ता मोहित अशोक ने व्यक्तिगत रूप से यह जनहित याचिका दायर की है, जिसमें कोर्ट से यह विशेष आग्रह किया गया है कि वे सीबीआई को इस कथित गबन मामले की सघन जांच करने और दोषियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज करने का कड़ा निर्देश जारी करें। इसके साथ ही, याचिकाकर्ता ने मंदिर की वित्तीय व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से दानपात्रों में चढ़ावे के रूप में आने वाली भारी-भरकम नकद धनराशि, सोने-चांदी के आभूषणों तथा अन्य सभी कीमती वस्तुओं का ऑडिट देश की सर्वोच्च संस्था नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से कराने की भी एक बड़ी मांग अदालत के सामने रखी है।
याचिकाकर्ता का स्पष्ट तर्क है कि करोड़ों हिंदुओं की अगाध आस्था के केंद्र भगवान श्रीराम के मंदिर (Ram Mandir ) में दान की संपत्ति की हेराफेरी के आरोप राष्ट्रीय समाचार पत्रों में छपने से वैश्विक स्तर पर भक्तों की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है, जिसके निवारण के लिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच और कैग ऑडिट होना बेहद अनिवार्य है; इस याचिका में केंद्र व राज्य सरकार समेत सीबीआई, कैग और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी औपचारिक रूप से पक्षकार बनाया गया है।
राम मंदिर (Ram Mandir ) में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर उठा यह विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ता जा रहा है, जिसके चलते मंदिर प्रबंधन की व्यवस्था को लेकर देश के शीर्ष नीतिगत हलकों में भी भारी मंथन शुरू हो गया है। सूत्रों से मिली बेहद महत्वपूर्ण जानकारी के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी पूरे विवाद और अब तक की आंतरिक जांच की एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में मंदिर प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्था से जुड़े विभिन्न नीतिगत पहलुओं की नए सिरे से व्यापक समीक्षा की जाएगी।
इस बीच, प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं; जांच के दायरे में आए कुछ संदिग्ध कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका उजागर होने के बाद प्रबंधन उनकी सेवाएं पूरी तरह समाप्त करने अथवा उन्हें वित्तीय और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से तत्काल हटाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है, और इसके साथ ही मंदिर परिसर में तैनात कई अन्य कर्मचारियों के कार्यभार और दायित्वों में भी बड़ा फेरबदल किया जा सकता है ताकि संपूर्ण व्यवस्था को जनता के प्रति अधिक जवाबदेह तथा पारदर्शी बनाया जा सके।
इसी कड़ी में बुधवार को अयोध्या के गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर रही कि कथित तौर पर गबन की गई राशि में से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की भारी रकम बरामद कर ली गई है, और इस वित्तीय गड़बड़ी में शामिल कुछ संदिग्धों से कड़ी पूछताछ करने के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत बैंक खातों की डिटेल्स खंगालने का काम भी तेजी से चल रहा है। हालांकि, इस कथित गबन के मामले में जब सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक (मैनेजर) से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इस संवेदनशील विषय पर कुछ भी बोलने से पूरी तरह इन्कार कर दिया, लेकिन यह माना जा रहा है कि दान के पैसों की गिनती और प्रबंधन कार्य में लगे बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी वर्तमान में कड़े जांच के दायरे में है, जबकि इस पूरे घटनाक्रम पर राम मंदिर ट्रस्ट ने अभी भी रणनीतिक चुप्पी साध रखी है।
दूसरी तरफ, राम मंदिर (Ram Mandir ) के पूर्व लेखा प्रभारी (अकाउंट्स इन-चार्ज) महिपाल सिंह के सनसनीखेज दावों ने इस पूरे विवाद की आग में घी डालने का काम किया है; सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो बयान तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने दावा किया है कि राम मंदिर की दान राशि में नोटों की गड्डियों की हेराफेरी कर पैसे चुराने का यह खेल काफी लंबे समय से बदस्तूर जारी है।
महिपाल सिंह ने व्यवस्था से जुड़े कुछ बेहद प्रभावशाली और वरिष्ठ लोगों के नामों का सीधा उल्लेख करते हुए यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि जब उन्होंने पूर्व में इस चोरी और वित्तीय अनियमितता की लिखित शिकायत उच्चाधिकारियों से की थी, तब सच्चाई सामने लाने के इनाम के रूप में उन्हें पद से ही निष्कासित कर दिया गया था, जिसने अब इस कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई को और अधिक गंभीर बना दिया है।
राम मंदिर के दान में गबन मामले में बड़ा मोड़! CBI जांच के लिए हाईकोर्ट में PIL दाखिल
