संसद भवन परिसर और लुटियंस दिल्ली के आसपास स्थिति काफी तनावपूर्ण और संवेदनशील बनी हुई है। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके द्वारा बुलाए गए ‘चलो संसद’ मार्च को लेकर जंतर-मंतर से लेकर संसद मार्ग तक हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं। पुलिस द्वारा संसद मार्च की पूर्व अनुमति न मिलने और नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस की धारा 163 लागू होने के बावजूद भीड़ जंतर-मंतर पर एकत्र हुई और संसद भवन की ओर बढ़ने लगी।
प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने संसद मार्ग पर बैरिकेडिंग की थी, लेकिन जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, तो स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करने के साथ-साथ वाटर कैनन और आंसू गैस के गोलों का प्रयोग करना पड़ा। इसके जवाब में कई प्रदर्शनकारी रेल भवन और प्रेस क्लब के पास धरने पर बैठ गए। संसद भवन की सुरक्षा के मद्देनजर मुख्य द्वारों को बंद कर दिया गया है और दिल्ली मेट्रो ने एहतियातन राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय तथा सेवा तीर्थ जैसे पांच प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं।
इस बड़े सड़क प्रदर्शन के बीच राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संसद भवन के भीतर गृह मंत्री अमित शाह से एक अहम मुलाकात की है, जिसे सुरक्षा स्थिति और प्रदर्शनकारियों की मांगों के परिप्रेक्ष्य में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी दौरान सरकार ने बातचीत का रास्ता खोलते हुए सीजेपी के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया, जिसके तहत कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधि आशुतोष रांका और सौरव दास केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात करने पहुंचे हैं।
जंतर-मंतर और मार्च के दौरान विपक्षी नेताओं की भी भारी मौजूदगी देखी गई। आम आदमी पार्टी के मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख व सांसद चंद्रशेखर आजाद प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वे युवाओं का दर्द समझते हैं और अन्याय के खिलाफ उनकी आवाज बनने के लिए संघर्ष में शामिल हुए हैं। इनके अलावा अभिनेता प्रकाश राज और अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि वांगचुक भी छात्रों का हौसला बढ़ाने पहुंचीं।
यह पूरा आंदोलन मुख्य रूप से नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक, राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में आ रही अनियमितताओं और युवाओं में फैलती बेरोजगारी के विरोध में चलाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों और सीजेपी की मुख्य मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इन गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दें और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए व्यापक प्रशासनिक सुधार किए जाएं।
