लखनऊ। उत्तर प्रदेश का सिद्धार्थनगर ( Siddharthnagar) जनपद, जो कभी नीति आयोग की आकांक्षी जिलों की सूची में अपनी पिछड़ी स्थिति के लिए जाना जाता था, आज विकास, विश्वास और संभावनाओं का प्रतीक बनकर उभर रहा है।
तथागत गौतम बुद्ध की पावन भूमि, कपिलवस्तु की ऐतिहासिक विरासत और शाक्य परंपरा से जुड़े इस जिले ने बीते वर्षों में एक उल्लेखनीय परिवर्तन यात्रा तय की है। इस परिवर्तन की सजीव अभिव्यक्ति है पांच दिवसीय सिद्धार्थनगर महोत्सव ( Siddharthnagar Mahotsav) , जो जिले की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक सशक्त पहल है।
वर्ष 2018 में नीति आयोग के सर्वे में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, आधारभूत संरचना और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में सिद्धार्थनगर की स्थिति अत्यंत चिंताजनक पाई गई थी। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपनाई गई सुनियोजित विकास नीति, विभागीय समन्वय और परिणाम आधारित कार्यशैली ने जिले की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल दीं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण सितंबर 2023 में सामने आया, जब नीति आयोग की 112 आकांक्षी जिलों की ओवरऑल रैंकिंग में सिद्धार्थनगर ने देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया।
इसी विकास यात्रा को सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ता है सिद्धार्थनगर महोत्सव ( Siddharthnagar Mahotsav) । यह महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जिले की नई पहचान का उत्सव है। लोक कला, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, स्थानीय उत्पादों और सरकारी योजनाओं के माध्यम से यह महोत्सव सामाजिक समरसता को मजबूत करता है। स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को अपने उत्पादों की बिक्री का सीधा लाभ मिल रहा है, वहीं युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ा जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जिले में मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, महिला छात्रावास, ऑडिटोरियम और कपिलवस्तु में विपश्यना केंद्र जैसी परियोजनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि सिद्धार्थनगर ( Siddharthnagar) अब आकांक्षा नहीं, उपलब्धि का जिला बन चुका है। विरासत और विकास के इस संतुलित संगम के साथ सिद्धार्थनगर आज नए उत्तर प्रदेश की नई कहानी लिख रहा है।
