धनंजय सिंह के गढ़ में बाहुबली बृजेश सिंह की दस्तक, बेटे सिद्धार्थ को लॉन्च करने की तैयारी

धनंजय सिंह के गढ़ में बाहुबली बृजेश सिंह की दस्तक, बेटे सिद्धार्थ को लॉन्च करने की तैयारी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक पार्टियां अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप दे रही हैं, लेकिन यूपी के ‘पूर्वांचल’ की जमीन पर एक अलग ही तरह की राजनीतिक पटकथा लिखी जा रही है। इस समय पूर्वांचल में सबसे ज्यादा चर्चा जौनपुर जिले को लेकर हो रही है, जिसे पूर्व सांसद धनंजय सिंह का मजबूत गढ़ माना जाता है। अब इस मैदान में बाहुबली बृजेश सिंह (Brijesh Singh) अपनी सियासी हनक कायम करने की फिराक में हैं। योगी सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में ओबीसी कमीशन के गठन को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद सूबे में पंचायत चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। इसी का फायदा उठाते हुए बृजेश सिंह ने जौनपुर की राजनीतिक पिच से अपने बेटे सिद्धार्थ सिंह को सियासी रूप से लॉन्च करने का पूरा प्लान तैयार किया है।
बृजेश सिंह (Brijesh Singh) जौनपुर के जिला पंचायत चुनाव में अपने बेटे सिद्धार्थ सिंह को उतारकर धनंजय सिंह के सियासी रसूख को चुनौती देना चाहते हैं। वाराणसी के रहने वाले बृजेश सिंह को जौनपुर की इस सियासी रणभूमि में लाने के पीछे बीजेपी नेता कृपा शंकर सिंह और पूर्व सांसद कुंवर हरिवंश सिंह की मुख्य भूमिका मानी जा रही है। बाहुबली बृजेश सिंह वर्तमान में भदोही-वाराणसी-चंदौली क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य (MLC) हैं और उनकी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह भी एमएलसी रह चुकी हैं। अब तक बृजेश सिंह ने अपना सियासी वर्चस्व गाजीपुर, भदोही, वाराणसी और चंदौली तक ही सीमित रखा था और जौनपुर की राजनीति में वे कभी दखल नहीं देते थे, लेकिन अब समीकरण बदल चुके हैं। महाराणा प्रताप जयंती पर जौनपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में बृजेश सिंह और उनके बेटे सिद्धार्थ सिंह के एक साथ पहुंचने के बाद से ही इन कयासों को बल मिला, जिसकी पुष्टि बीजेपी नेता कृपा शंकर सिंह के संकेतों से भी होती है।
रणनीति के तहत बृजेश सिंह (Brijesh Singh) अपने बेटे सिद्धार्थ सिंह को जौनपुर की केराकत ब्लॉक की सीट से जिला पंचायत चुनाव लड़ाने की योजना पर काम कर रहे हैं। इससे पहले साल 2021 में सिद्धार्थ ने भदोही से चुनाव लड़ने की तैयारी की थी और बीजेपी कार्यालय में टिकट के लिए आवेदन भी किया था, लेकिन बाद में उन्होंने अपने कदम पीछे खींच लिए थे। भदोही जहां ब्राह्मण बहुल इलाका माना जाता है, वहीं जौनपुर एक ठाकुर बहुल क्षेत्र है। इसके अलावा जौनपुर में बृजेश सिंह की बेटी की ससुराल भी है, जिसके चलते उन्हें यहाँ सामाजिक और पारिवारिक ताना-बाना अपने पक्ष में नजर आ रहा है। धनंजय सिंह के धुर विरोधी माने जाने वाले पूर्व सांसद कुंवर हरिवंश सिंह और कृपा शंकर सिंह पर्दे के पीछे से बृजेश सिंह को पूरा समर्थन दे रहे हैं ताकि धनंजय सिंह के प्रभाव को कम किया जा सके।
जौनपुर की सियासत लंबे समय से धनंजय सिंह और उनके परिवार के इर्द-गिर्द घूमती रही है। चाहे मल्हनी विधानसभा सीट हो या जौनपुर लोकसभा, धनंजय सिंह का रसूख हमेशा दिखाई देता है। मौजूदा वक्त में उनकी पत्नी श्रीकला रेड्डी जौनपुर की जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। हालांकि, इस नए घटनाक्रम और संभावित चुनौती पर खुद धनंजय सिंह ने एक इंटरव्यू में बेबाकी से कहा था कि जौनपुर से किसी को भी चुनाव लड़ने की पूरी आजादी है और उन्हें किसी से कोई सियासी खतरा महसूस नहीं होता। ऐसे में यदि बृजेश सिंह अपने बेटे सिद्धार्थ को चुनावी मैदान में उतारते हैं, तो जौनपुर में धनंजय सिंह बनाम बृजेश सिंह का सीधा और दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।
पूर्वांचल की ठाकुर राजनीति में धनंजय सिंह, राजा भैया और बृजेश सिंह जैसे दिग्गजों के बीच के रिश्ते समय-समय पर बदलते रहे हैं। हाल के दिनों में जहां धनंजय सिंह के संबंध बृजेश सिंह के साथ तल्ख हुए हैं, वहीं पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के साथ उनकी सियासी केमिस्ट्री मजबूत होती दिख रही है। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान धनंजय और बृजभूषण सिंह एक साथ नजर आए थे। दूसरी तरफ, धनंजय सिंह के धुर विरोधी विधायक अभय सिंह की इन दिनों बृजेश सिंह और विनीत सिंह के साथ नजदीकियां बढ़ी हैं, जिससे साफ है कि ठाकुर बाहुबली दो अलग-अलग ध्रुवों में बंटते जा रहे हैं, जिसका मुख्य केंद्र जौनपुर बनता दिख रहा है।
जौनपुर की जमीनी हकीकत को देखें तो धनंजय सिंह को उनके घर में मात देना किसी भी नए चेहरे के लिए बेहद कठिन माना जाता है। उनका स्थानीय स्तर पर मजबूत कार्यकर्ताओं का नेटवर्क, पत्नी श्रीकला रेड्डी का जिला पंचायत पर प्रशासनिक नियंत्रण और जनता के बीच उनकी विशिष्ट छवि उनके विरोधियों पर हमेशा भारी पड़ती है। हालांकि, बृजेश सिंह का परिवार भी अमूमन भाजपा के करीब या पर्दे के पीछे से समर्थित माना जाता रहा है, जबकि धनंजय सिंह भी इन दिनों भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संपर्क में दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में दो बाहुबली परिवारों की प्रतिष्ठा की यह लड़ाई जौनपुर के आगामी जिला पंचायत और विधानसभा चुनावों को बेहद रोचक बनाने वाली है।