गणेश जयंती पर भद्रा का साया, फिर कैसे होगी पूजा?

गणेश जयंती पर भद्रा का साया, फिर कैसे होगी पूजा?

सनातन धर्म में गणेश जी (Ganesh) प्रथम पुज्य माने जाते हैं। अर्थात गणेश जी की पूजा सबसे पहले की जाती है। जब जीवन में कोई विघ्न आता है, तो सबसे पहले गणेश जी का स्मरण किया जाता है। गणेश जी जीवन के हर विघ्न को दूर करते हैं, इसलिए उनको विघ्नहर्ता कहा गया है। माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित की गई है।
माघ माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन गणेश जंयती मनाई जाती है। इसे माघ विनायक चतुर्थी या गौरी गणेश चतुर्थी भी कहा जाता है। गणेश जयंती (Ganesh Jayanti) का पर्व विश्वास, भक्ति और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस साल की गणेश जयंती खास है, क्योंकि इस दिन रवि योग रहेगा। ये योग पूजा-पाठ के लिए बहुत शुभ रहता है। इस दिन वरीयान योग और परिघ योग भी बन रहे हैं, लेकिन भद्रा का वास भी रहेगा।
कब है गणेश जयंती? (Ganesh Jayanti)
पंचांग की गणना के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी 2026 को रात 02 बजकर 47 मिनट पर होगी। वहीं इस तिथि का समापन 23 जनवरी 2026 को रात 02 बजकर 28 मिनट पर हो जाएगा। चूंकि उदया तिथि और दोपहर का समय 22 जनवरी को मिल रहा है, इसलिए गणेश जयंती 22 जनवरी 2026, गुरुवार को ही मनाई जाएगी।
गणेश जयंती (Ganesh Jayanti) पूजा शुभ मुहूर्त
वहीं गणेश जयंती (Ganesh Jayanti) के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 22 जनवरी को सुबह 11 बजकर 29 मिनट हो जाएगा। पूजा का ये शुभ मुहूर्त 01 बजकर 37 मिनट तक करीब दो घंटे का रहेगा।
गणेश जयंती (Ganesh Jayanti) के दिन रहेगा भद्रा का साया
गणेश जयंती भद्रा के साए में मनाई जाएगी। क्योंकि इस दिन भद्रा धरती पर वास करेगी। 22 जनवरी को गणेश जयंती पर भद्रा काल दोपहर 02 बजकर 40 मिनट से शुरू होगा। ये 23 जनवरी को तड़के 02 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। लिहाजा भद्रा काल में पूजा-पाठ समेत अन्य कोई भी शुभ काम नहीं किया जा सकेगा। इसलिए इस दिन भद्रा काल शुरू होने से पहले पूजा-पाठ कर लें।
क्यों नहीं किए जाते इस दिन चंद्र दर्शन?
शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन चंद्र दर्शन करना शुभ नहीं माना जाता है। अगर आप इस दिन चांद देखते हैं, तो आप पर झूठे आरोप या मानहानि हो सकती है। यही कारण है कि माघ गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन वर्जित किया गया है।