हर किसी का सपना होता है कि उसके पास अपनी एक कार हो. लेकिन जब लोग शोरूम में जाते हैं तो कई बार कन्फ्यूजन हो जाता है. सेल्समैन अक्सर FWD, RWD, AWD और 4×4 जैसे तकनीकी शब्द बताते हैं, जिन्हें समझना आम ग्राहक के लिए मुश्किल हो जाता है. कई लोग बिना समझे ही कार खरीद लेते हैं और बाद में उन्हें पछताना पड़ता है.
असल में ये सभी कार के ड्राइव सिस्टम होते हैं. ये तय करते हैं कि इंजन की ताकत कार के किन पहियों तक पहुंचेगी. इसी पर कार का माइलेज, कीमत, पकड़ (ग्रिप) और खराब रास्तों पर चलने की क्षमता निर्भर करती है. आइए इन्हें आसान भाषा में समझते हैं.
FWD और RWD क्या होते हैं?
FWD (फ्रंट व्हील ड्राइव) में इंजन की पावर आगे के दो पहियों को मिलती है. पीछे के पहिये सिर्फ साथ चलते हैं. भारत में ज्यादातर छोटी कारें और कॉम्पैक्ट SUVs इसी सिस्टम पर चलती हैं क्योंकि यह हल्का होता है और बेहतर माइलेज देता है. वहीं RWD (रियर व्हील ड्राइव) में पावर पीछे के पहियों को मिलती है. यह सिस्टम ज्यादा ताकत और बेहतर बैलेंस देता है. इसलिए इसे अक्सर बड़ी गाड़ियों और स्पोर्टी ड्राइविंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
AWD और 4×4 में क्या अंतर है?
AWD (ऑल व्हील ड्राइव) एक स्मार्ट सिस्टम है जिसमें कार का कंप्यूटर खुद तय करता है कि किस पहिये को कितनी पावर देनी है. जरूरत के हिसाब से चारों पहियों में पावर बांटी जाती है. यह सिस्टम शहर और हल्के खराब रास्तों दोनों के लिए अच्छा माना जाता है.
दूसरी तरफ 4×4 (फोर बाय फोर) सिस्टम पूरी तरह ऑफ-रोडिंग के लिए बनाया गया है. इसमें ड्राइवर खुद चुनता है कि चारों पहियों को बराबर पावर कब देनी है. इसमें हाई और लो गियर का ऑप्शन भी मिलता है, जिससे गाड़ी कीचड़, पहाड़, रेत और कठिन रास्तों पर आसानी से चल सकती है.
आपके लिए कौन सा सिस्टम सही है?
अगर आप सिर्फ शहर में ड्राइव करते हैं और बेहतर माइलेज चाहते हैं तो FWD सबसे सही है.अगर आपको ज्यादा पावर और मजबूत ड्राइविंग चाहिए तो RWD बेहतर ऑप्शन है.पहाड़ी या खराब रास्तों पर सुरक्षा और ग्रिप के लिए AWD अच्छा है और अगर आपका मकसद एडवेंचर और ऑफ-रोडिंग है तो 4×4 ही सबसे दमदार विकल्प है.इस तरह कार खरीदने से पहले इन ड्राइव सिस्टम्स को समझना बेहद जरूरी है, ताकि आप अपनी जरूरत के हिसाब से सही फैसला ले सकें.
