ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Swami Avimukteshwaranand) पर मुकदमा दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी (Ashutosh Brahmachari) ने खुद एक बड़ा खुलासा किया। आशुतोष ब्रह्मचारी ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार कर लिया है कि उन्होंने शंकराचार्य पर यौन शोषण का जो मुकदमा दर्ज कराया था, वह पूरी तरह फर्जी था और उन्होंने यह कदम भारी दबाव में आकर उठाया था। आशुतोष के अनुसार, तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य और उनके गुरु भाई रामचंद्र दास ने उन पर इस एफआईआर के लिए दबाव बनाया था। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे षड्यंत्र में कई अन्य लोग भी शामिल हैं, जिनके नामों का खुलासा वे जल्द ही करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि यदि उन्हें कुछ भी होता है, तो उसका सीधा जिम्मेदार रामचंद्र दास ही होगा।
आशुतोष ब्रह्मचारी (Ashutosh Brahmachari) ने आरोप लगाया कि रामचंद्र दास ने पहले उन पर शंकराचार्य के खिलाफ मामला दर्ज कराने का दबाव बनाया और अब वही व्यक्ति केस वापस लेने के लिए उन पर मानसिक तौर पर हावी हो रहा है, जिसके पीछे एक गहरा षड्यंत्र है। गौरतलब है कि यह वही आशुतोष ब्रह्मचारी (आशुतोष महाराज) हैं, जिन्होंने पूर्व में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर दो बटुकों (शिष्यों) के यौन शोषण का सनसनीखेज आरोप लगाया था, जबकि पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक आशुतोष पर खुद पहले से ही 21 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस विवाद के बीच आशुतोष ने यह भी सनसनीखेज दावा किया है कि उनके पास गुरु की हत्या से जुड़े पुख्ता साक्ष्य और एविडेन्स मौजूद हैं।
इस कबूलनामे से महज दो दिन पहले आशुतोष ब्रह्मचारी (Ashutosh Brahmachari) ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर आने वाले दिनों में जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज की हत्या किए जाने की आशंका जताई थी। वीडियो में उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया था कि यदि उनके पूज्य गुरुदेव पद्मविभूषण स्वामी रामभद्राचार्य की हत्या होती है, तो इसके लिए बटुकों के साथ कुकर्म करने वाला रामचंद्र दास उर्फ जय त्रिपाठी (मिश्रा) ही मुख्य रूप से दोषी होगा। इस संबंध में आशुतोष ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को एक लिखित शिकायत भी भेजी है, जिसमें उन्होंने गुरुदेव से संबंधित ऑडियो-वीडियो साक्ष्यों और रामचंद्र दास की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
इस पूरे प्रकरण और संगीन आरोपों पर पलटवार करते हुए जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश-विदेश में उनकी और उनके उत्तराधिकारी की छवि को धूमिल करने के लिए यह एक सोची-समझी साजिश रची जा रही है। जगद्गुरु ने प्रशासन को बताया कि उन्हें और उनके उत्तराधिकारी को किसी अन्य से नहीं, बल्कि खुद आशुतोष ब्रह्मचारी से जान का खतरा है। उन्होंने कहा कि वे कथा और धार्मिक आयोजनों के सिलसिले में लगातार प्रवास पर रहते हैं और इस प्रकार की अनर्गल बयानबाजी ने उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचाया है।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि यह संभव है कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहीं और जाकर दीक्षा ले ली हो, लेकिन उसके मन में इस प्रकार की घिनौनी भावनाएं और विचार पनप रहे होंगे, इसका उन्हें रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था। जगद्गुरु ने इस प्रकार की बयानबाजी की कड़े शब्दों में घोर निंदा की है और उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश शासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की बेहद सघन और वैधानिक रूप से निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों की कानूनी पड़ताल होना जरूरी है ताकि इस पूरे विवाद के पीछे छिपी असल सच्चाई समाज के सामने आ सके।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद केस में बड़ा यू-टर्न: आशुतोष ब्रह्मचारी ने कबूला फर्जी मुकदमे का सच
