वॉशिंगटन डीसी: एक नए अध्ययन में पाया गया है कि अंदर ही अंदर दबाया गया तनाव (Stress) —खासतौर पर निराशा की भावनाएं—बढ़ती उम्र में याददाश्त के तेजी से कमजोर होने का कारण बन सकता है। यह शोध Rutgers Health के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है और इसे The Journal of Prevention of Alzheimer’s Disease में प्रकाशित किया गया है।
शोध में विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक आयु के चीनी-अमेरिकी लोगों पर ध्यान दिया गया, क्योंकि इस समूह पर पहले कम अध्ययन हुआ है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग अपने तनाव और भावनाओं को व्यक्त करने के बजाय भीतर दबाकर रखते हैं, उनमें समय के साथ याददाश्त में गिरावट अधिक देखी गई।
अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता Michelle Chen ने कहा कि एशियाई-अमेरिकी समुदाय में “मॉडल माइनॉरिटी” जैसी सांस्कृतिक धारणाएं लोगों पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं, जिससे उनकी भावनात्मक समस्याएं अक्सर नजरअंदाज हो जाती हैं। भाषा की बाधाएं और सांस्कृतिक अंतर भी तनाव को बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं।
यह अध्ययन Population Study of Chinese Elderly (PINE) के डेटा पर आधारित है, जिसमें 2011 से 2017 के बीच शिकागो क्षेत्र में रहने वाले 1,500 से अधिक बुजुर्गों के इंटरव्यू शामिल किए गए।
शोध में तीन प्रमुख कारकों का विश्लेषण किया गया—अंदरूनी तनाव (internalised stress), सामुदायिक सहयोग और बाहरी तनाव से राहत। इनमें से केवल अंदरूनी तनाव का ही याददाश्त में गिरावट से मजबूत संबंध पाया गया, जबकि अन्य कारकों का खास प्रभाव नहीं दिखा।
विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि इस प्रकार का तनाव नियंत्रित किया जा सकता है, इसलिए सही और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील उपाय अपनाकर बुजुर्गों की मानसिक और संज्ञानात्मक सेहत को बेहतर बनाया जा सकता है।
तनाव बढ़ती उम्र में याददाश्त को पहुंचा सकता है नुकसान
