देहरादून। भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन (C.P. Radhakrishnan) ने गुरुवार को एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए नवस्नातक चिकित्सकों से सहानुभूति, ईमानदारी और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता के साथ सेवा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपलब्धि का क्षण नहीं, बल्कि समाज और देश के प्रति बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत है।
उपराष्ट्रपति (C.P. Radhakrishnan) ने कहा कि ऋषिकेश केवल हिमालय का प्रवेश द्वार ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चिंतन और उपचार का वैश्विक केंद्र भी है। ऐसे प्रेरणादायी वातावरण में आयोजित दीक्षांत समारोह युवा डॉक्टरों को नई दिशा देने वाला है।
उन्होंने (C.P. Radhakrishnan) कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने नवाचार और प्रतिबद्धता का परिचय दिया। व्यापक टीकाकरण अभियान और वैक्सीन मैत्री पहल के जरिए भारत ने दुनिया के 100 से अधिक देशों तक सहायता पहुंचाकर “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को साकार किया।
मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व की सराहना
उपराष्ट्रपति (C.P. Radhakrishnan) ने उत्तराखंड में स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे के विकास की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार समावेशी विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए सराहनीय कार्य कर रही है। उन्होंने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सहित क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास कार्यों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने एम्स ऋषिकेश की उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि संस्थान नैदानिक सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। टेलीमेडिसिन सेवाओं, हेली एम्बुलेंस और चारधाम यात्रा के दौरान ड्रोन से दवा वितरण जैसी पहलों को उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों के लिए प्रभावी समाधान बताया।
राज्यपाल बोले- पर्वतीय क्षेत्रों की चुनौतियों को अवसर बनाएं
इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने कहा कि चिकित्सा सेवा केवल पेशा नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और समर्पण का क्षेत्र है। उन्होंने युवा चिकित्सकों से पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों को अवसर में बदलने और दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा देने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने कहा कि मरीज केवल इलाज ही नहीं, बल्कि विश्वास और आशा लेकर डॉक्टर के पास आता है। ऐसे में चिकित्सकों का व्यवहार, सहानुभूति और समर्पण ही सबसे बड़ी पूंजी है।
मुख्यमंत्री धामी बोले- चिकित्सा सेवा मानवता का सर्वोच्च माध्यम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह उनके जीवन के नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वोच्च माध्यम है, जिसे निष्ठा, संवेदनशीलता और करुणा के साथ निभाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित एम्स ऋषिकेश आज उत्तराखंड के लिए जीवन रक्षक संस्थान बन चुका है। यहां कैंसर उपचार, न्यूरोसर्जरी, रोबोटिक सर्जरी और जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
उन्होंने बताया कि ऊधमसिंह नगर में एम्स ऋषिकेश के सैटेलाइट सेंटर का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे कुमाऊं क्षेत्र को भी उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।
स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भी किया संबोधित
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि चिकित्सा पेशा केवल करियर नहीं, बल्कि मानव सेवा का श्रेष्ठ माध्यम है। उन्होंने डॉक्टरों से मरीजों के विश्वास को बनाए रखने, नैतिकता को प्राथमिकता देने और निरंतर सीखते रहने का आह्वान किया।
कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट, एम्स ऋषिकेश के अध्यक्ष प्रो. राज बहादुर, कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह, डीन अकादमिक प्रो. सौरभ, संकाय सदस्य, छात्र-छात्राएं एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
