LPG Crisis: फिर शुरू होगा केरोसिन, पेट्रोल पंपों से भी होगी सप्लाई

LPG Crisis: फिर शुरू होगा केरोसिन, पेट्रोल पंपों से भी होगी सप्लाई

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच केंद्र सरकार ने देश में ईंधन की किल्लत दूर करने के लिए एक बड़ी आपातकालीन योजना की घोषणा की है। सोमवार को जारी इस 60-दिवसीय प्लान के तहत सरकार ने उन क्षेत्रों में भी मिट्टी का तेल (Kerosene) फिर से शुरू करने का फैसला किया है, जिन्हें पहले ‘केरोसिन-मुक्त’ घोषित कर दिया गया था। इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन घरों को खाना पकाने और रोशनी के लिए वैकल्पिक ईंधन देना है, जहाँ एलपीजी (LPG) की सप्लाई में दिक्कत आ रही है।
सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए राज्यों को 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन के कोटे को मंजूरी दी है। अब चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर भी घरेलू इस्तेमाल के लिए ‘सुपीरियर केरोसिन ऑयल’ (SKO) उपलब्ध होगा। नए नियमों के अनुसार, हर जिले में अधिकतम दो फ्यूल स्टेशनों को 5,000 लीटर तक केरोसिन (Kerosene) रखने की अनुमति दी गई है। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए डीलर्स और ट्रांसपोर्टर्स के लाइसेंस नियमों में ढील दी गई है, ताकि जनता तक ईंधन जल्द पहुंच सके। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में इस व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
ईंधन की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों ने देशभर में करीब 2,900 ठिकानों पर छापेमारी कर 1,000 से ज्यादा गैस सिलेंडर जब्त किए हैं। राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे रोजाना निगरानी करें और अफवाहों पर लगाम लगाएं। इसी बीच, पीएनजी (PNG) का उपयोग करने वाले लगभग 6,000 उपभोक्ताओं ने स्वेच्छा से अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं, जिससे घरेलू गैस के नेटवर्क पर दबाव कम हुआ है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने इस पहल के लिए जनता का आभार व्यक्त किया है।
सप्लाई मैनेजमेंट को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू और ट्रांसपोर्ट सेक्टर उनकी पहली प्राथमिकता है, इसलिए सीएनजी (CNG) और पीएनजी सेक्टर को पूरा कोटा दिया जा रहा है। हालांकि, औद्योगिक और कमर्शियल इस्तेमाल करने वालों को फिलहाल उनकी औसत खपत का 80 प्रतिशत हिस्सा ही मिल पा रहा है। सरकार स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और भविष्य की जरूरतों के लिए अतिरिक्त एलएनजी (LNG) कार्गो की भी व्यवस्था की जा रही है ताकि ऊर्जा आपूर्ति में कोई बाधा न आए।