लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली संकट अब बीते दौर की बात बन गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ने बिजली की कमी से जूझने वाले राज्य की छवि को पीछे छोड़ते हुए ऊर्जा स्थिरता और आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं। प्रदेश में बिजली की मांग व आपूर्ति (Power Supply) के बीच का अंतर लगातार घटा है और अब यह लगभग शून्य के स्तर पर पहुंच गया है। योगी आदित्यनाथ सरकार का मानना है कि मजबूत बिजली व्यवस्था ही मजबूत अर्थव्यवस्था की बुनियाद होती है। बेहतर बिजली आपूर्ति के चलते प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ा है, एमएसएमई सेक्टर को संबल मिला है और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 में उत्तर प्रदेश की बिजली की कुल आवश्यकता 1 लाख 44 हजार 251 मिलियन यूनिट थी। योगी सरकार ने बिजली की मांग व आपूर्ति (Power Supply) के अंतर को समाप्त करने के लिए नीतियों और प्रबंधन सुधारों का जो प्रयास किया, उसका असर दिखने लगा। वित्त वर्ष 2023-24 में आपूर्ति 1 लाख 48 हजार 287 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 1 लाख 64 हजार 786 मिलियन यूनिट हो गई। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक की स्थिति में व्यापक सुधार हुआ। इस अवधि में बिजली की कमी व्यावहारिक रूप से लगभग खत्म हो गई है।
योगी सरकार ने बिजली उत्पादन और आपूर्ति के साथ साथ पारेषण व वितरण व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया। राष्ट्रीय ग्रिड के माध्यम से अधिशेष बिजली वाले राज्यों से उत्तर प्रदेश को समय पर बिजली उपलब्ध कराई गई। सर्वाधिक मांग (पीक ऑवर) के समय भी प्रदेश में बिजली आपूर्ति (Power Supply) लगभग पूरी की गई, जिससे उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिली।
संशोधित वितरण क्षेत्र सुधार योजना (आरडीएसएस) के अंतर्गत जर्जर लाइनों को बदला गया, ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई और स्मार्ट मीटरिंग को बढ़ावा दिया गया। इससे वितरण कंपनियों के घाटे में कमी आई और बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ। ग्रामीण इलाकों में बिजली पहुंचाने के लिए दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना और सौभाग्य योजना के जरिए बड़े स्तर पर काम किया गया। गांवों और घरों तक बिजली पहुंचने से कृषि, कुटीर उद्योग और छोटे कारोबार को नई गति मिली है।
