माघ मास की पूर्णिमा हिंदू धर्म में केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और पुण्य संचय का विशेष अवसर मानी जाती है। माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) 1 फरवरी यानी शनिवार को श्रद्धा और नियमों के साथ मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी को सुबह 5:52 बजे से शुरू होकर 2 फरवरी को रात 3:38 बजे तक रहेगी। शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि इस दिन स्नान, दान और पूजा से जहां पुण्य कई गुना बढ़ता है, वहीं कुछ छोटी-सी लापरवाही भी पापों को बढ़ा सकती है। यही कारण है कि माघ पूर्णिमा पर हर कर्म सोच-समझकर और श्रद्धा के साथ करने की परंपरा रही है।
शास्त्रों के अनुसार, माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) पर स्नान न करना सबसे गंभीर भूल मानी गई है। विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त या प्रातःकाल स्नान को अत्यंत फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा, यमुना या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं। जो व्यक्ति स्नान किए बिना ही दिन व्यतीत करता है, उसके पुण्य कर्म अधूरे माने जाते हैं। यदि नदी स्नान संभव न हो, तो घर पर स्वच्छ जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी शास्त्रसम्मत बताया गया है। बिना स्नान के की गई पूजा और दान पूर्ण फल नहीं देते।
तामसिक भोजन और गलत आहार से दूरी जरूरी
माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) पर तामसिक भोजन का सेवन शास्त्रों में सख्त वर्जित बताया गया है। इस दिन मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन और अत्यधिक मसालेदार भोजन से दूरी बनाना आवश्यक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा तिथि सात्विक ऊर्जा से भरपूर होती है और तामसिक आहार उस पवित्र ऊर्जा को कमजोर कर देता है। कई धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि इस दिन गलत आहार करने से पुण्य कर्मों का प्रभाव कम हो जाता है और मानसिक अशांति बढ़ती है। इसलिए माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) पर हल्का, सात्विक और संयमित भोजन ही ग्रहण करना श्रेष्ठ माना गया है।
क्रोध, असत्य और नकारात्मक सोच से बचें
माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) केवल बाहरी पूजा का नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि का पर्व भी है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन क्रोध करना, झूठ बोलना, किसी की निंदा करना या कटु वचन बोलना बड़ा दोष माना जाता है। ऐसा आचरण व्यक्ति के संचित पापों को और बढ़ा सकता है।
मान्यता है कि पूर्णिमा पर मन, वाणी और कर्म तीनों की शुद्धता अत्यंत आवश्यक होती है। यदि कोई व्यक्ति स्नान और पूजा तो करता है, लेकिन दिनभर नकारात्मक विचारों में डूबा रहता है, तो उसे पूर्ण पुण्य की प्राप्ति नहीं होती।
दान और पूजा में लापरवाही न करें
शास्त्रों के अनुसार, माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) पर दान और पूजा में की गई लापरवाही भी पाप का कारण बन सकती है। बिना श्रद्धा के किया गया दान या अधूरी पूजा निष्फल मानी जाती है। इस दिन अन्न, वस्त्र, तिल, घी या धन का दान विशेष पुण्यदायी बताया गया है, लेकिन गलत समय या अशुद्ध मन से किया गया दान फल नहीं देता। पूजा के दौरान स्वच्छता, दीपक, धूप और मंत्र जाप का ध्यान रखना आवश्यक है। मान्यता है कि विधिपूर्वक और श्रद्धा से किया गया प्रत्येक कर्म ही पापों से मुक्ति दिलाता है।
माघ पूर्णिमा पर न करें ये गलतियां, पूजा का नहीं मिलेगा पुण्य
