देहरादून : खनन (Mining) गतिविधियों को लेकर सामान्य तौर पर लोगों में नकारात्मक अवधारणा रहती है। लेकिन उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खनन आवंटन और खनन परिवहन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के साथ ही अवैध खनन (Illegal Mining) पर सख्ती दिखाई। इसी का नतीजा है कि डेढ़ साल से कम समय में सालाना खनन राजस्व 300 करोड़ से बढ़कर 1200 करोड़ के पार पहुंच गया है।
प्रदेश सरकार ने सितंबर 2024 में नई खनन नीति (New Mining Policy) लागू की थी। नई खनन नीति में ई-नीलामी के जरिए खनन लॉट आवंटन, खनन गतिविधियों की सैटेलाइट निगरानी जैसे कई नए प्रयोग किए गए। साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस-प्रशासन को भी अवैध खनन पर सख्ती दिखाने के निर्देश दिए, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। सितंबर 2024 से पहले राज्य को खनन से केवल 300 करोड़ रुपये तक ही सालाना राजस्व प्राप्त हो पाता था, लेकिन अब यह राजस्व 1200 करोड़ के पार चला गया है।
यही नहीं, उत्तराखंड को खनन सुधार लागू करने के लिए देशभर में दूसरा स्थान प्राप्त हो चुका है, जिसके फलस्वरूप केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए “पूंजी निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता योजना (SASCI)” के अंतर्गत उत्तराखंड के लिए 200 करोड़ रुपये की विशेष सहायता स्वीकृत की है।
इन सुधारों से बदली तस्वीर
- ई-नीलामी के जरिए खनन लॉट आवंटन
- अवैध खनन पर प्रभावी रोक
- खनन परिवहन के लिए माइनिंग सर्विलांस सिस्टम
- खनन गतिविधियों की डिजिटल ट्रैकिंग और निरीक्षण
सीएम धामी ने कहा की आम लोगों को आवासीय या अन्य निर्माण के लिए खनन (Mining) सामग्री की आवश्यकता होती है, साथ ही विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए भी खनन जरूरी है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि खनन पर्यावरणीय मानकों के अनुसार हो और इसके लिए पारदर्शी तंत्र विकसित किया गया है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इससे राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे जनकल्याणकारी योजनाओं को गति मिली है।
