चीन के शहर वुहान से शुरू हुए कोविड-19 ने पूरी दुनिया में कहर मचाया था। अब एक बार फिर एक और वायरस दहशत फैला रहा है। इस वायरस का नाम नोरोवायरस (Norovirus) है। यह वायरस फैलता जा रहा है। एक स्कूल में अब 100 से ज्यादा छात्र संक्रमित पाए गए हैं।
दक्षिणी चीन के ग्वांगडोंग प्रांत के फोशान शहर के एक सीनियर हाई स्कूल में 103 छात्र नोरोवायरस से संक्रमित पाए गए। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि कोई भी मामला गंभीर नहीं है और न ही किसी की मौत हुई है।
नोरोवायरस (Norovirus) एक आम वायरस है जिसका असर पेट में होता है। यह वायरस पेट के संक्रमण का कारण बनता है, इससे उल्टी और डायरिया होता है। शिंगहुई मिडिल स्कूल के छात्रों में भी ऐसे ही लक्षण दिखे। सभी 103 छात्रों की हालत स्थिर है। स्कूल परिसर को सैनिटाइज कर दिया गया है और छात्रों की सेहत पर निगरानी रखी जा रही है।
68.5 करोड़ लोग नोरोवायरस (Norovirus) से संक्रमित होते
नोरोवायरस (Norovirus) वायरसों का एक ग्रुप है, इसमें काफी ज्यादा उल्टी होती है और दस्त होते हैं। यह बीमारी बहुत आम है और बहुत जल्दी फैलती है। नोरोवायरस के मामले ज्यादातर सर्दियों में सामने आते हैं। अमेरिका में यह खाने से फैलने वाली बीमारियों का नंबर 1 कारण है।
हर साल दुनिया भर में लगभग 68.5 करोड़ लोग नोरोवायरस से संक्रमित होते हैं। इनमें 5 साल से कम उम्र के करीब 20 करोड़ बच्चे शामिल हैं। यह वायरस हर साल करीब 2 लाख लोगों की मौत का कारण बनता है, जिनमें लगभग 50 हजार बच्चे होते हैं। इसका असर खासतौर पर गरीब देशों में ज्यादा देखा जाता है। इलाज और आर्थिक नुकसान मिलाकर इससे दुनिया को करीब 60 अरब डॉलर का नुकसान होता है।
1968 में आया था पहला केस
नोरोवायरस (Norovirus) का पहला बड़ा मामला 1968 में अमेरिका के ओहायो राज्य के नॉरवॉक शहर में सामने आया था। यह घटना एक स्कूल से जुड़ी थी, जहां एक साथ कई लोग बीमार पड़ गए थे। इसी के बाद वैज्ञानिकों ने इस बीमारी पर रिसर्च शुरू कर दी थी।
चूंकि यह बीमारी सबसे पहले नॉरवॉक शहर में पहचानी गई थी, इसलिए इस वायरस को शुरुआत में नॉरवॉक वायरस कहा गया। बाद में इसी वायरस को नोरोवायरस के नाम से जाना जाने लगा।
नोरोवायरस गैस्ट्रोएंटेराइटिस यानी पेट के संक्रमण का कारण बनता है, जिसे लोग कभी-कभी स्टमक फ्लू कहते हैं।
चीन में वायरस की वापसी! स्कूल बना हॉटस्पॉट, 100 से ज्यादा छात्र संक्रमित
