ऑटोमोबाइल की दुनिया बेहद बड़ी और रंगीन है, लेकिन अगर गौर करें तो इसमें गाड़ियां (Cars) मोटे तौर पर दो ही तरह की होती हैं. एक वो जो बिना अलग दिखे आम ग्राहकों की जरूरतें पूरी करती हैं, और दूसरी वो जो भीड़ से हटकर होती हैं, जिनमें कुछ खास होता है. चाहे वो डिजाइन हो, टेक्नोलॉजी या परफॉर्मेंस. ऐसी कारें लोगों का ध्यान खींचती हैं, चर्चा में रहती हैं और एक अलग पहचान बनाती हैं.
भारतीय बाजार में भी समय-समय पर कई ऐसी कूल कारें लॉन्च हुईं, जिन्होंने लोगों को उत्साहित किया और उम्मीद जगाई कि कुछ नया देखने को मिलेगा. लेकिन अफसोस, हर स्टाइलिश या इनोवेटिव कार कमर्शियल रूप से सफल नहीं हो पाती. ऊंची कीमत, सीमित कस्टमर सेगमेंट और गलत समय पर लॉन्च होना अक्सर इनके रास्ते में आ जाता है.
इसी वजह से कई शानदार कारें (Cars) बड़े इरादों के साथ आईं, लेकिन धीरे-धीरे बाजार से गायब हो गईं. आज हम आपको इस खबर के माध्यम से उन कारों के बारे में बताने जा रहे हैं जो लॉन्च तो हुई लेकिन फ्लॉप रही.
टाटा नैनो (Tata Nano)
पुराने समय में, जब रतन टाटा ने खुद “जनता की कार” को मात्र 1 लाख रुपये में लॉन्च करने की घोषणा की, तो ये खबर सुर्खियों में छा गई. ज़ाहिर है, इस घोषणा के साथ उत्साह और आलोचना दोनों देखने को मिलीं. टाटा नैनो निस्संदेह एक शानदार कार थी. शुरुआत में ये विचार एक कल्पना मात्र लग रहा था, लेकिन आखिरकार इसे साकार कर दिया गया. हालांकि, उस दौर की सबसे सस्ती कार के रूप में प्रचारित होने से लोगों की उम्मीदें कम हो गईं. इतना ही नहीं, सिंगूर प्लांट विवाद के कारण इसके लॉन्च में देरी हुई. इसका परिणाम ये हुआ कि नैनो को थोड़ी ज्यादा शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया. इतनी सारी चुनौतियों का सामना करने के कारण, टाटा नैनो को वो लोकप्रियता नहीं मिली जिसकी उससे उम्मीद की जा रही थी.
मारुति सुजुकी बलेनो अल्टुरा (Maruti Suzuki Baleno Altura)
बलेनो सेडान पर बेस्ड स्टेशन वैगन वेरिएंट बनाने का मारुति की कोशिश अपने समय से आगे थी. जिसके कारण भारतीय बाजार में बलेनो अल्टुरा चुपचाप बाजार से गायब हो गई. हालांकि, जिस बलेनो सेडान पर बेस्ड थी, वो मारुति सुजुकी के लिए अच्छी तरह से चली, क्योंकि सेडान को हमेशा अमीरों और सरकारी अधिकारियों की कार माना जाता था.
शेवरले एसआर-वी (Chevrolet SR-V)
जब बाजार का ध्यान केवल ए-सेगमेंट हैचबैक और सी-सेगमेंट सेडान पर बेस्ड था, तब शेवरले एसआर-वी की एंट्री हुई. एक स्पोर्टी हैचबैक, जिसमें शानदार डिजाइन और दमदार परफॉर्मेंस थी. विशेषज्ञों का कहना है कि एसआर-वी की कीमत अपने सेगमेंट के हिसाब से बहुत ज्यादा थी. ब्रांड की कमजोरी और कम ईंधन दक्षता इसकी विफलता का कारण बन गई. अंततः इसे बहुत कम खरीदार मिले, लेकिन ये कार अपने समय से काफी आगे थी और इसका डिज़ाइन सड़क पर हर किसी का ध्यान आकर्षित करती थी.
फॉक्सवैगन बीटल (Volkswagen Beetle)
विश्व स्तर पर एक शानदार कार, बीटल को भारत में एक लाइफस्टाइल कार के रूप में लॉन्च किया गया था. इसकी ऊंची कीमत और भारतीय सड़कों के लिए इनप्रैक्टिकैलिटी के कारण ये बहुत कम ही देखने को मिलती थी. अपने शानदार लुक के साथ, दो दरवाजों वाली, रियर-इंजन वाली हैचबैक कार केवल महानगरों के समृद्ध इलाकों में ही कुछ खरीदारों को आकर्षित कर सकी. आज भी, बीटल भारतीय सड़कों पर बहुत कम ही दिखाई देती है.
टोयोटा सेरा (Toyota Sera)
सीमित संख्या में इंपोर्ट की गई सेरा अपने बटरफ्लाई डोर और कांच से बने डिजाइन के साथ फ्यूचरिस्टिक दिखती थी. लेकिन हाई कीमत और सर्विस सपोर्ट की कमी के कारण ये आम बाजार में सफल होने के बजाय कलेक्टरों का सपना बनकर रह गई. अपने समय में, सेरा आज की फॉक्सवैगन जीटीआई से कम नहीं थी. भले ही इसका प्रदर्शन कमज़ोर था, लेकिन इसके डोर ने इस हैचबैक की शान को और बढ़ा दिया.
सब कुछ था, फिर भी बाजार से गायब हो गईं ये कारें! जानें वजह
