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खाने के तेल की कीमतों ने किया बुरा हाल

नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल और गैस की बढ़ती कीमतों ने आम-आदमी का बजट बिगाड़ कर रखा है। वहीं, अब खाने के तेल (Edible oil) की कीमतों ने बुरा हाल कर दिया। हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक बाजार में उपलब्ध सस्ता कुकिंग ऑयल (cooking oil) खरीद रहे हैं लोग। बता दें, रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से खाद्य तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। यूक्रेन दुनिया भर में सूर्यमुखी के तेल का सप्लाई करने वाला एक प्रमुख देश है।

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LocalCircles ने सोमवार को प्रकाशित अपने रिपोर्ट में कहा, ‘खाद्य तेल (edible oil) की कीमतों में हो रहे लगातार इजाफे की वजह से मध्यम आय के लोग सस्ता और कम अच्छे क्वालिटी के कुकिंग ऑयल खरीदने पर मजबूर हुए हैं।’ रिपोर्ट के अनुसार पिछले 12 महीनों के खाद्य तेल की कीमतों में 50 से 100 प्रतिशत तक उछाल देखने को मिला। वहीं, रूस और यूक्रेन युद्ध की वजह से पिछ्ले 45 दिन में खाने का तेल 40% महंगा हुआ है।

सरसों के तेल से लेकर सोयबीन के तेल तक सभी कुंकिंग ऑयल (cooking oil) की कीमतों में 50 से 70% तक इजाफा पिछले कुछ महीनों में देखने को मिला है। जनवरी की तुलना में पैक्ड सूर्यमुखी के तेल की कीमतों फरवरी में 4% का और सरसों के तेल की कीमतों में 8.7% का इजाफा देखने को मिला है।

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केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान में तिलहनों और खाद्य तेलों की जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए छापेमारी जारी है और पांच अन्य राज्यों में भी विशेष टीमें इसकी जांच कर रही हैं। आधिकारिक बयान के मुताबिक, तिलहन के प्रमुख उत्पादक एवं खपत वाले राज्यों में थोक एवं खुदरा विक्रेताओं, शॉपिंग श्रृंखला विक्रेताओं और मिलों की तरफ से की जा रही जमाखोरी रोकने के लिए खाद्य तेलों एवं तिलहनों के भंडारगृहों पर औचक छापेमारी की जा रही है। इसके लिए महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, गुजरात और नयी दिल्ली के लिए विशेष टीमें भेजी गई हैं।

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